देश में 'साइलेंट क्रांति' ला रहे हैं इलेक्ट्रिक वाहन : प्रधानमंत्री मोदी

गांधीनगर/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को इलेक्ट्रिक वाहनों को ध्वनि प्रदूषण से निजात दिलाने का सबसे बड़ा जरिया बताया और कहा कि ई-वाहनों से सड़कों पर ‘साइलेंट क्रांति’ आएगी। उन्होंने कहा कि ई-वाहनों की खासियत होती है कि वे शोर नहीं करते हैं।

भारत में चार पहिया वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी के 40 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री रविवार को गांधीनगर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने इससे पहले भारत में सुजुकी समूह की दो प्रमुख परियोजनाओं गुजरात के हंसलपुर में सुजुकी मोटर गुजरात इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग इकाई और हरियाणा के खरखोदा में मारुति सुजुकी की आगामी वाहन निर्माण इकाई की आधारशिला रखी।

प्रधानमंत्री ने कहा, “इलेक्ट्रिक वाहनों की एक बड़ी खासियत ये होती है कि वो साइलेंट होते हैं। 2 पहिया हो या 4 पहिया, वो कोई शोर नहीं करते। ये साइलेंस केवल इसकी इंजीनियरिंग का ही नहीं है, बल्कि ये देश में एक ‘साइलेंट क्रांति’ के आने की शुरुआत भी है।”

उन्होंने कहा कि आज भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार जितनी तेजी से बड़ा हो रहा है, कुछ वर्ष पहले तक उसकी कल्पना भी नहीं होती थी। आज लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को एक एक्स्ट्रा व्हीकल नहीं समझ रहे हैं, बल्कि उसे प्रमुख साधन मानने लगे हैं। देश भी पिछले 8 वर्षों से इस बदलाव की जमीन तैयार कर रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-वाहनों की मांग बढ़ाने के लिए सरकार कई तरह के प्रयास कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सीओपी-26 में ये घोषणा की है कि वो 2030 तक अपनी स्थापित विद्युत क्षमता की 50 प्रतिशत क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोत से हासिल करेगा। हमने 2070 के लिए ‘नेट ज़ीरो’ का लक्ष्य तय किया है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के साथ सुजुकी का पारिवारिक रिश्ता अब 40 वर्ष का हो गया है। आज एक ओर गुजरात में इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी के उत्पादन के लिए महत्वाकांक्षी प्लांट का शिलान्यास हो रहा है साथ ही हरियाणा में नई कार उत्पादन फैसिलिटी की शुरुआत भी हो रही है। ये विस्तार सुजुकी के लिए भविष्य की अपार संभावनाओं का आधार बनेगा।

उन्होंने कहा कि मारुति-सुज़ुकी की सफलता भारत-जापान की मजबूत पार्टनरशिप का भी प्रतीक है। बीते आठ वर्षों में तो हम दोनों देशों के बीच ये रिश्ते नई ऊंचाइयों तक गए हैं। आज गुजरात-महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन से लेकर उत्तर प्रदेश में बनारस के रुद्राक्ष सेंटर तक, विकास की कितनी ही परियोजनाएं भारत-जापान दोस्ती का उदाहरण हैं। और इस दोस्ती की जब बात होती है, तो हर एक भारतवासी को हमारे मित्र पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे जी की याद जरूर आती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आबे जब गुजरात आए थे, उन्होंने जो समय यहां बिताया था, उसे गुजरात के लोग बहुत आत्मीयता से याद करते हैं। हमारे देशों को और करीब लाने के लिए जो प्रयास उन्होंने किए थे, आज पीएम किशिदा उसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात और जापान के बीच जो रिश्ता रहा है, वो कूटनीतिक दायरों से भी ऊंचा रहा है। मुझे याद है जब 2009 में वाइब्रेंट गुजरात समिट का आयोजन शुरू हुआ था, तभी से जापान इसके साथ एक पार्टनर कंट्री के तौर पर जुड़ गया था।

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