फसल और नस्ल बचाने के लिए देश में फिर होगा बड़ा आंदोलन : चौधरी राकेश टिकैत

मथुरा। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने रविवार दोपहर बाद बारिश के बीच किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा किसान को एकजुट होकर फसल ओर नस्ल की लड़ाई लड़नी होगी। वर्तमान सरकार उन अंग्रेजों की सरकार है जिन्होंने देश को गुलाम बना दिया, आज फिर से देश को गुलामी की जंजीर में जकड़ने जा रही है। अगर हम जग कर अपने लिए नही लड़े तो हम सब को इसके बुरे परिणाम झेलने पड़ेंगे।

किसान महा पंचायत का आयोजन बारिश के कारण एसडी पब्लिक स्कूल मानागढ़ी में हुआ। मानागढ़ी किसान सरदारी व कार्यक्रम आयोजक समिति ने चौधरी राकेश टिकैत के चांदी का मुकट व पगड़ी बांध कर स्वागत किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस विभाग के आला अधिकारी एवं पुलिस बल बड़ी तादाद में सभा स्थल पर मौजूद रहे।

राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने कहा कि वर्तमान बीजेपी सरकार ने किसानों पर अत्याचार किए हैं। पॉलिटिकल पार्टियों को दबा दिया है जिससे कि कोई भी पक्ष वर्तमान सरकार पर पलटवार ना कर सके 1992 में लगे मुकदमे वर्तमान सरकार ने दोबारा से खोल कर किसानों पर थोप दिए हैं। बीजेपी सरकार के नुमाइंदों पर लगे मुकदमे वापस कर लिए गए हैं। सरकार की मंशाओं को लेकर एक बहुत बड़े आंदोलन का आगाज करना पड़ेगा एक समय वह था जब किसान कहता था सरकार सुनती थी अधिकारी सुनते थे लेकिन वर्तमान सरकार में किसान कहता है लेकिन उसकी कोई सुनता नहीं।

चौधरी राकेश टिकैत ने खुले मंच से चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी अधिकारी, कर्मचारी किसान का अहित करेंगे, उनका शोषण करेंगे ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों का हिसाब वहीं किया जाएगा। वहीं एनजीटी के कानूनों में बदलाव हो क्योंकि एनजीटी के कानून से केवल और केवल उद्यमियों की बड़ी कंपनियों को फायदा होगा और किसानों को घाटा होता चला जाएगा। वर्तमान सरकार एक अन्य बिल लेकर के आ रही है जिसमें कि बाहर की कंपनियां भारत में आकर के दूध बेचेंगी। अगर ऐसा होता है तो किसानों के पशु व किसान खत्म हो जाएंगे, इसका भारतीय किसान यूनियन बहुत बड़े आंदोलन के जरिए विरोध करेगी। जिस तरह से केंद्र सरकार तीन काले कानून ले करके आई थी भारतीय किसान यूनियन ने 14 महीने दिल्ली में कानून के विरोध में आंदोलन किया और कानूनों को वापस कराया। ठीक उसी प्रकार के तीन काले कानून बिहार में 17 वर्ष पूर्व लागू किये गए, जिसके कारण से बिहार में कोई भी मंडी नहीं बची है।

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