द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने से बढ़ा महिलाओं का सम्मानः ज्ञानदेव सिंह महाराज

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के संतों ने द्रौपदी मुर्मू को देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति चुने जाने पर शुभकामनाएं प्रदान करते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।

शुक्रवार को जारी बयान में श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू का एक आदिवासी महिला के रूप में राष्ट्रपति पद की कमान संभालना पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। इससे महिलाओं का सम्मान तो बढ़ा ही है, साथ ही आदिवासी समुदाय की भावनाओं को भी गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इसके लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद के लिए चुना। उन्होंने कहा कि संत समाज द्रौपदी मुर्मू को आशीर्वाद प्रदान करता है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि हम सभी को उम्मीद है कि द्रौपदी मुर्मू एक कुशल राष्ट्रपति के रूप में भारत के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराएंगी। उन्होंने कहा कि देश को तरक्की की ओर अग्रसर करने में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो सभी के लिए हर्ष का विषय है। हमें बेटी-बेटे में अंतर नहीं करना चाहिए और समाज में फैली इस कुरीति के प्रति सबको जागरूक रहना चाहिए। बेटी समाज का गौरव हैं और महिलाओं के बिना एक सशक्त समाज के निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम सभी को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए और प्रत्येक क्षेत्र में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना चाहिए।
 

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