एग्पा सम्मेलनः जनजातीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत वित्तीय समावेश जरूरी

एग्पा सम्मेलनः जनजातीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत वित्तीय समावेश जरूरी


- समग्र विकास के लिये वित्तीय समावेश को बनायें प्रभावी टूल : प्रो. विश्वास

-सतत विकास के लिए भागीदारी और नागरिक संगठनों के अनुभवों पर दो दिवसीय सम्मेलन

भोपाल, 08 अप्रैल (हि.स.)। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा राजधानी भोपाल में सतत विकास के लिए भागीदारी और नागरिक संगठनों के अनुभवों पर दो दिवसीय सम्मेलन (एग्पा सम्मेलन) का आयोजन किया जा रहा है, जिसका शुक्रवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल द्वारा शुभारम्भ किया गया। सत्र में पहले दिन विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत वित्तीय समावेश जरूरी है।

सम्मेलन में सतत विकास के लिए भागीदारी और नागरिक संगठनों के अनुभवों सत्र में अपने विचार रखते हुए समहित समुदाय विकास सेवाएँ के बोर्ड सदस्य प्रो. पी.के. विश्वास ने कहा कि समग्र विकास की गति में तेजी लाने के लिये वित्तीय समावेश को प्रभावी टूल बनाना होगा। देश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। विश्व के देशों में भारत को वित्तीय समावेश का रोल मॉडल माना जा रहा है।

प्रो. विश्वास ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों और जनजाति बहुल क्षेत्रों में शत-प्रतिशत वित्तीय समावेश आवश्यक है। इसके लिये स्व-सहायता समूहों को ज्ञान संसाधन संस्था के रूप में काम करना होगा और लोगों को वित्त संबंधी विषयों की निरंतर जानकारी देना होगी।

सेंटर फार इकॉनामिक सेक्टर अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के प्रमुख सलाहकार राहुल चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता बढाने के विभिन्न चैनल्स तक पहुँच बढ़ाने और सूक्ष्म एवं लघु उदयोगों के लिये बैंकों के सहयोग को बढाना होगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वित्तीय साक्षरता को तेजी से बढाना होगा। साथ ही साबर क्राइम के विभिन्न तरीकों के संबंध में भी जागरूकता जरूरी है।

विशेषज्ञों ने माइक्रो फाइनेंस पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं को क्रेडिट उपलब्ध कराने के लिये विशेष प्रयास किये जाने चाहिए। आरबीआई भोपाल की डीजीएम ज्योति सक्सेना ने कहा कि रिजर्व बैंक के अनुसार सभी गाँवों में बैंक शाखाएँ होना चाहिए। इसके लिये गाँवों में वित्तीय साक्षरता का प्रसार निरंतर करने की आवश्यकता है।

प्रदेश में पॉजिटिव-पे सिस्टम लागू

नाबार्ड के डीजीएम कमर जावेद ने कहा कि पहले एसएचजी मॉडल लागू हुआ था, जिसके माध्यम से गाँव तक पहुँच बढ़ी है। अब सहकारी बैंकों के नेटवर्क में भी सुधार होना चाहिए। सहकारी बैंकों में पॉजिटिव-पे सिस्टम लागू हो गया है। ऐसा करने वाला मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है। वित्तीय साक्षरता बढने के लिये सहकारी बैंको के माध्यम से नाबार्ड धनराशि भी उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कई वित्तीय प्रोडक्ट जैसे जीवन ज्योति योजना के बारे में बताया कि गाँवों हर नागरिक को ऐसे प्रोडक्ट के बारे में जानने की जरूरत है।

प्रदान संस्था भोपाल की इंटीग्रेटर डॉ. अर्चना ने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को ज्यादा से ज्यादा लोन देकर प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के संचालन से महिलाओं में वित्तीय समझ और साक्षरता बढ़ाने में मदद मिली है। जनजातीय क्षेत्रों में स्वयं सेवी संस्थाओं को इस दिशा में और ज्यादा सक्रिय रहने की आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के तरीकों पर सुझाव देते हुए विशेषज्ञों और मैदानी स्तर पर काम कर रहे नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों का मत था कि स्थानीय बोलियों में वित्तीय साक्षरता का संदेश प्राथमिकता से दिया जाये।

इस मौके पर एमएफआईएन इंडिया गुरुग्राम की प्रमुख सेल्स इनीशिएटिव्स अचला सब्यसाची, एंटरप्रेन्योरियल टेक्नोलॉजी लीडर मुंबई के रितेश जैन और अपराजिता महिला संघ इंदौर की सीईओ रेखा रामजे ने वित्तीय साक्षरता पर काम करने की आवश्यकता बताई।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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