भोपालः विविध कलानुशासनों की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन

भोपालः विविध कलानुशासनों की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन


भोपालः विविध कलानुशासनों की प्रस्तुतियों ने मोहा दर्शकों का मन


भोपाल, 19 मार्च (हि.स.)। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा 75वें आज़ादी अमृत महोत्सव के तहत विविध कलानुशासनों की प्रस्तुतियों एकाग्र सातत्य का आयोजन प्रतिदिन मप्र जनजातीय संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर किया जा रहा है। कार्यक्रम में शनिवार शाम को मणिमाला सिंह एवं साथी, रीवा द्वारा बघेली नृत्य एवं फाग गायन और स्वाति यादव एवं साथी, सागर द्वारा कथक समूह नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत कलाकारों के स्वागत से की गई, जिसमें जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम बघेली फाग गायन एवं नृत्य की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने गणेश वंदना पार्वती के पुत्र गजानन झूल रहे पलना..., मैहर की तुम मात शारदा पार न पाई कोय..., अंगना म उड़त अबीर बलम होरी को रिसाने..., मोह पर रंग न ड़ारा सांवरिया आयों पिया की चोरी..., हमसे न करा लड़कईंयां कुंबर प्यारे हमसे न करा लड़कईंयां..., तोरी सूरत जड़ी है नगीना म, पिया अइहै तुम कउने महीना मा..., गीतों की प्रस्तुति दी।

मंच पर गायन में मणिमाला सिंह, उर्मिला मिश्रा, सारिका मिश्रा, हारमोनियम पर अतेंद्र पांडे, तबले पर रावेंद्र मिश्रा, ढोलक पर राज द्विवेदी, ऩगड़िया पर अमित सोनी एवं बेंजो पर पवन गिरि ने संगत की। नृत्य प्रस्तुति में विशाल सोंधिया, सत्यम क्षेत्रिय, शुभम केसरवानी, अनंत साकेत, वैष्णवी आहूजा, वर्षा दाहिया, भावना त्रिपाठी एवं शशि दाहिया ने संगत की।

अगली प्रस्तुति स्वाति यादव एवं साथी, सागर द्वारा कथक समूह नृत्य की दी गई, जो होली पर आधारित रही। प्रस्तुति की शुरुआत शिव स्तुति ओंकार आदिनाथ से की गई। यह रचना आगरा घराने के प्रतिनिधि डॉ राजेश केलकर बरोदा, गुजरात द्वारा रचित व स्वरबद्ध की गई है। इसके पश्चात तीनताल विलम्बित में उठान, ठाट, आमद और कुछ बोल तत्पश्चात मध्यलय में होली पर केंद्रित बंदिश जो की विश्वप्रख्यात संगीतज्ञ पद्मभूषण आचार्य पं श्रीकृष्ण नारायण रातंजनकर जी की रचना "होरी खेलन को चले कन्हैया पर प्रस्तुति दी गई। इसके उपरांत परंपरागत ठुमरी "रंग डारूंगी डरूंगी" पर भाव करने के बाद एक चतुरंग और अंत में रास गरबा से प्रस्तुति का समापन किया।

प्रस्तुति के दौरान नृत्य में स्वाति यादव, नवीन सोनी, आरोही श्रीवास्तव, अनादि श्रीवास्तव, वैष्णवी चौबे, शिखा यादव, मुस्कान सोनी ने कला का प्रदर्शन किया। वहीं संगत कलाकारों में गायन एवं संगीत पर संयोजन यशगोपाल श्रीवास्तव, तबले पर शैलेन्द्र सिंह राजपूत एवं गगन राज,पढन्त पर रागिनी श्रीवास्तव, बांसुरी पर पंकज खरहारे, ढोलक पर शुभम सेन एवं कोरस पर अंशुल आठिया मौजूद रहे। कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण भी सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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