जनजातीय समाज में बसी है माटी की सुगंध: राज्यपाल पटेल

जनजातीय समाज में बसी है माटी की सुगंध: राज्यपाल पटेल

भोपाल : राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय समाज में माटी की सुगंध आज भी बसी है। दुनिया को भारत की देन आयुर्वेद जनजातीय समाज और वनों की बदौलत है। उनके विकास के प्रयासों में आत्मीयता और अपनेपन का भाव होना जरूरी है।  पटेल आज म.प्र. पर्यटन, टाइम्स ऑफ इंडिया और ताज ग्रुप द्वारा आयोजित टाइम्स पैशन ट्राइबल ट्रेल एवं ताज ट्राइबल फूड फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस लोक कलाकार पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को सम्मानित कर तुलसी का पौधा भेंट किया।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मीयता और संस्कार आज भी गाँव की आत्मा में बसे हुए है। उनकी भावनाओं में निहित आत्मीयता को समझने की जरूरत है। उन्होंने राम चरित मानस के राम-शबरी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि शबरी ने चख-चख कर बेर भगवान राम को खिलाए। खाए हुए बेर खिलाने के पीछे भगवान राम को मीठा बेर खिलाने की आत्मीयता का भाव ही जनजातीय समाज का स्वरूप बताता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के विकास की यह पहल सराहनीय है। राज्यपाल को अनूपपुर फूड कल्चर एवं टूरिस्म पुस्तक की प्रथम प्रति कलेक्टर अनूपपुर सोनिया मीणा ने भेंट की।

जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  मीना सिंह ने कहा कि जनजातीय समाज हमारा गौरव है। उनके द्वारा ही जल,जंगल और जमीन का संरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के शिल्प, कला और खाद्य पदार्थों की उचित विपणन व्यवस्था के प्रयास जरूरी है। उन्होंने आयोजन को इस दिशा में सार्थक पहल बताया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  उषा ठाकुर ने कहा कि जनजातीय समाज शुद्ध-चित्त, प्रकृति के सच्चे-स्वरूप और मातृभूमि के गौरव है। मैकाले की शिक्षा व्यवस्था ने जिस व्यवस्था को दिग्भ्रमित कर दिया था, उस वैदिक जीवन पद्धति को जनजातीय भाई-बहनों ने ही अक्षुण बनाया है। उन्होंने बताया कि यूनेस्को के वर्ड, कल्चरल हेरिटेज में झाबुआ जिले के भगौरिया को शामिल किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने महू में बड़ा देव की पूजा के तीन दिवसीय उत्सव में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  बिसाहूलाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति के ऋषि मुनियों के जीवन से संबद्ध अनेक महत्वपूर्ण स्थल जनजातीय क्षेत्रों में स्थित है। इन क्षेत्रों के विकास से क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ बनाई जा सकती है।

प्रमुख सचिव पर्यटन  शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि आयोजन जनजातीय संस्कृति के आर्थिक और सामाजिक मजबूती की पहल है। समाज के सभी अंगों को जोड़कर जनजातीय समाज को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने का प्रयास है। टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक  प्रसेनजित मुंड ने जनजातीय समाज की जीवनशैली और औषधीय ज्ञान को प्रसारित किये जाने की जरूरत बताई, ताज ग्रुप की जनरल मैनेजर कनिका हसरत ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज के रहन-सहन और खान-पान का गहन अध्ययन, शोध और प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं का परिणाम फूड फेस्टिवल का आयोजन है। इस अवसर पर लोक कलाकार पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका डॉ.  तीजन बाई द्वारा अपने विशिष्ट वेग और संप्रेषण के द्वारा महाभारत के दुशासन वध के प्रसंग को प्रस्तुत किया।

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