आरा के महन्थ महादेवानन्द महिला कॉलेज में दर्शन परिषद का अधिवेशन शुरू

आरा के महन्थ महादेवानन्द महिला कॉलेज में दर्शन परिषद का अधिवेशन शुरू


आरा के महन्थ महादेवानन्द महिला कॉलेज में दर्शन परिषद का अधिवेशन शुरू


आरा,12 मार्च(हि. स)।विज्ञान एवं दर्शन एक दूसरे के पूरक हैं। दोनों में से किसी का एक-दूसरे से कोई विरोध नहीं है। बस दोनों की पद्धतियां भिन्न हैं।यह बातें सुप्रसिद्ध गणितज्ञ एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के कुलपति डॉ. के. सी. सिन्हा ने कही। वे शनिवार को दर्शन परिषद् बिहार के 43 वें त्रिदिवसीय वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे थे। यह अधिवेशन शनिवार को स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के तत्वावधान में एम. एम. महिला कालेज, आरा में आयोजित किया गया।

डॉ सिन्हा ने कहा कि दर्शन किसी भी क्षेत्र में ज्ञान का शिखर है। विज्ञान भी दर्शन के पीछे चलता है। उन्होंने कहा कि कोई भी विषय खराब नहीं है। किसी भी विषय में आगे जा सकते हैं। अतः दर्शन में ज्यादा से ज्यादा नामांकन हो।कार्यक्रम के उद्घाटन कर्ता मुख्य अतिथि भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. डॉ.रमेशचन्द्र सिन्हा ने कहा कि हमारे नालंदा, विक्रमशिला एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय की दुनिया में प्रसिद्धि है और अपने ज्ञान एवं दर्शन के कारण ही हम विश्वगुरू के रूप में प्रतिष्ठित रहे हैं। भारतीय दर्शन एवं संस्कृति मूल्यों पर आधारित है। इन्हीं प्राचीन जीवन मूल्यों को अपनाकर हम समाज, राष्ट्र एवं विश्व का कल्याण कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि दर्शन को आम लोगों से जोड़ने की जरूरत है।प्रति कुलपति डॉ. सी. एस. चौधरी ने कहा कि हमारा संपूर्ण जीवन ही दर्शन है। हम दर्शन से अलग नहीं हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है। जैसा कर्म वैसा फल। किसी दूसरे को दुःख देंगे, तो स्वयं आपको भी दुख होगा।उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन एवं आत्ममूल्यांकन करें। दोषारोपण नहीं करें। दिनभर के कार्यों का आकलन करें।आत्मचिंतन एवं आत्ममूल्यांकन करें। दोषारोपण नहीं करें अच्छाई को लें, बुराई छोड़ दें। किसी की भी निंदा मत करें।

आईआईटी पटना के निदेशक डॉ. टी. एन. सिंह ने कहा कि हमारे मन, वचन एवं कर्म में तारतम्य होना चाहिए। जीवन के लिए समृद्धि एवं शांति दोनों की जरूरत होती है। दोनों में समन्वय आने से।पूर्णता आती है। अतः हमारे जीवन में समृद्धि एवं शांति का संतुलन होना चाहिए।

राष्ट्रवादी विचारक महेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास आरा की चर्चा के बगैर अधूरा है। अत: आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष में दर्शन परिषद् के आयोजन का विशेष महत्व है।उन्होंने कहा कि दर्शन सिर्फ वर्तमान, भूत एवं भविष्य की भी बात करता है। हम दर्शन के माध्यम से जो अभिव्यक्त करें, उसे जीवन में भी उतरें। मूल्य शिक्षा को पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन का विषय बनाएं। मूल्य शिक्षा पाठ्यक्रम का विषय बनेगा, तो वह जीवन से दूर चला जाएगा।उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था भारत पर केंद्रीत नहीं है लेकिन नई शिक्षा नीति में भारत की आत्मा को समझने का प्रयास किया गया है। भारतीय शिक्षा एवं दर्शन दुनिया को मार्गदर्शन देगी। हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए।

सामान्य अध्यक्ष डॉ. आर. एन. पी. दिवाकर ने कहा कि दर्शन सत्यं-शिवम्- सुंदरम की अभिव्यक्ति है।आज विज्ञान भी दर्शन की बातों की पुष्टि कर रहा है।उन्होंने कहा कि भारत में विज्ञान काफी विकसित था। हमने पहले ही विमान शास्त्र, शल्यक्रिया आदि का अविष्कार कर लिया था। वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत है।

इस अवसर पर बीएचयू (वाराणसी) के डॉ. डी. एन. तिवारी, उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार सिंह, संयुक्त मंत्री द्वय डॉ. पूर्णेन्दु शेखर एवं डॉ. सुधांशु शेखर, कोषाध्यक्ष डॉ. वीणा कुमारी, डॉ. सरोज कुमार वर्मा, डॉ. विजय कुमार, डॉ. मुकेश कुमार, सत्यम् पब्लिकेशन, पटना के डॉ. नीरज प्रकाश आदि उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र

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