भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए आरएसएस ने विशेष प्रयास पर दिया बल

भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए आरएसएस ने विशेष प्रयास पर दिया बल


भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए आरएसएस ने विशेष प्रयास पर दिया बल


-कर्णावती (गुजरात) में संपन्न हुए त्रिदिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव को काशी प्रांत कार्यवाह मुरली पाल ने किया साझा

वाराणसी, 16 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वर्ष 2025 में अपने स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण करेगा। संघ के शताब्दी वर्ष में काशी प्रांत में भी दीर्घकालीन योजनाएं बनाई गई है। शताब्दी वर्ष में संघ ने अपने शाखा विस्तार पर खासा जोर दिया है। बुधवार शाम संघ के काशी प्रांत कार्यवाह मुरली पाल और सह प्रांत कार्यवाह डॉ राकेश तिवारी ने लंका स्थित विश्व संवाद केन्द्र में ये जानकारी पत्रकारों को संयुक्त रूप से दी। वार्ता में कर्णावती (गुजरात) में संपन्न हुए त्रिदिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव व अन्य निर्णयों की विस्तार से जानकारी दोनों पदाधिकारियों ने दी।

प्रांत कार्यवाह मुरली पाल ने बताया कि पूरे भारत में अभी कुल 38,390 स्थानों पर 60 हजार 929 शाखाएं चल रही हैं। वहीं, काशी प्रांत में संघ कार्य दृष्टि से इसके भौगोलिक क्षेत्र को 21 जिले और 5 महानगर में विभक्त किया गया है, जो सभी कार्य युक्त हैं। कुल 155 खंड हैं, जिनमें सभी शाखा युक्त हैं। कुल 105 नगरों में सभी नगर भी कार्य युक्त हैं। उन्होंने बताया कि काशी प्रांत में कुल 1606 स्थानों पर 2372 शाखाएं चलती हैं। इसके अलावा साप्ताहिक मिलन एवं मासिक मंडली भी चल रही है। उन्होंने बताया कि कुल 233 उपक्रमशील शाखा है, जिनके माध्यम से समाज के लिए कोई न कोई सेवा कार्य चल रहा है। अगर हम सेवा बस्ती की बात करें तो आज 489 सेवा बस्ती हैं, जिनमें से 258 में हमारी शाखा चल रही है। जबकि 198 में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वाबलंबन जैसे कोई न कोई आयाम वहां कार्य कर रहे हैं।

-त्रिदिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पारित प्रस्ताव

प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, मानवशक्ति की विपुलता और अंर्तनिहित उद्यमकौशल के चलते भारत अपने कृषि, विनिर्माण, और सेवा क्षेत्रों को परिवर्तित करते हुए कार्य के पर्याप्त अवसर उत्पन्न कर अर्थव्यवस्था को उच्च स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है। विगत कोविड महामारी के कालखंड में जहां देश ने रोजगार तथा आजीविका पर उसके प्रभावों का अनुभव किया है, वहीं अनेक नए अवसरों को उभरते हुए भी देखा है। भारतीय प्रतिनिधि सभा ने बल दिया कि रोजगार की इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए समूचे समाज को ऐसे अवसरों का लाभ उठाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साथ ही मानव केंद्रित, पर्यावरण के अनुकूल, श्रम प्रधान तथा विकेंद्रीकरण एवं लाभांश का न्यायसंगत वितरण करने वाले भारतीय आर्थिक प्रतिमान (मॉडल) को महत्व देने की बात भी की गई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सूक्ष्म उद्योग, लघु उद्योग और कृषि आधारित उद्योगों को संवर्धित करता है। ऐसे में ग्रामीण रोजगार, असंगठित क्षेत्र एवं महिलाओं के रोजगार और अर्थव्यवस्था में उनकी समग्र भागीदारी जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना चाहिए। हमारी सामाजिक परिस्थिति के अनुरूप नई तकनीकी तथा सॉफ्ट स्किल्स को अंगीकार करने के प्रयास करना अनिवार्य है।

-नवोन्मेषी पद्धतियों पर जोर

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने तेजी से बदलती आर्थिक तथा तकनीकी परिदृश्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामाजिक स्तर पर नवोन्मेषी पद्धतियों पर जोर दिया। उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं निर्यात की सम्भावनाओं से उत्पन्न रोजगार और उद्यमिता के अवसरों का गहन अन्वेषण रोजगार के पूर्व और दौरान मानव शक्ति के प्रशिक्षण, अनुसन्धान तथा तकनीकी नवाचार, स्टार्ट अप और हरित तकनीकी उपक्रमों आदि के प्रोत्साहन में सहभागी बनने की बात कही गई। सभा ने समाज के सभी घटकों का आह्वान किया कि विविध प्रकार के कार्य के अवसरों को बढ़ाते हुए शाश्वत मूल्यों पर आधारित एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति को स्थापित करें, जिससे भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर पुनः अपना उचित स्थान प्राप्त कर सके।

-भारत बोध के विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास पर बल

प्रतिनिधि सभा में सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत के विमर्श को मजबूत करने का, उसे प्रभावी बनाने का कार्य आने वाले वर्षों में विशेष प्रयास करते हुए करने का निर्णय किया गया है। भारत के हिन्दू समाज, संस्कृति, इतिहास, यहां की जीवन पद्धति के बारे में एक सही चित्र समाज के सम्मुख रखना चाहिए। भारत में और विदेशों में भी भारत के बारे में अज्ञान के कारण या जान बूझकर भ्रांतियां फैलाने का षड्यंत्र लंबे समय से चल रहा है। इस वैचारिक विमर्श को बदलकर तथ्यों पर आधारित भारत बोध के सही विमर्श को आगे बढ़ाना है।

प्रांत कार्यवाह मुरली पाल ने बैठक के अन्य बिन्दुओं को साझा करते हुए बताया कि सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रतिनिधि सभा में बताया कि भारत स्वाधीनता का अमृत महोत्सव मना रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन सार्वदेशिक और सर्वसमावेशी था। स्वामी दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद आदि आध्यात्मिक नेतृत्व ने देश के जन और जननायकों को ब्रिटिश अधिसत्ता के विरुद्ध सुदीर्घ प्रतिरोध के लिए प्रेरित किया। महिलाओं, जनजातीय समाज तथा कला, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान सहित राष्ट्र जीवन के सभी आयामों में स्वाधीनता की चेतना जागृत हुई। लाल-बाल-पाल, महात्मा गांधी, वीर सावरकर, नेताजी-सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह, वेलू नाचियार, रानी गाईदिन्ल्यू आदि ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने आत्म-सम्मान और राष्ट्र-भाव की भावना को और प्रबल किया। प्रखर देशभक्त डॉ. हेडगेवार के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने भी अपनी भूमिका का निर्वहन किया।

-प्रति वर्ष बड़ी संख्या में संघ से जुड़ रहे युवा

प्रांत कार्यवाह मुरली पाल ने बताया कि संघ में बड़ी संख्या में युवा जुड़ रहे है। पिछले दो वर्ष से कोविड संकट के बावजूद संघ कार्य 2020 की तुलना में 98.6 फीसदी पुनः प्रारम्भ हो चुका है। साप्ताहिक मिलन की संख्या भी बढ़ी है। दैनिक शाखाओं में 61 फीसद शाखाएं छात्रों की हैं और 39 फीसद व्यवसायी शाखाएं हैं। संघ की दृष्टि से देशभर में 6506 खंड हैं, इनमें से 84 फीसद में शाखाएं हैं। 59,000 मंडलों में से करीब 41 फीसद मंडलों में संघ का प्रत्यक्ष शाखा के रूप में कार्य है। 2303 नगरीय क्षेत्रों में से 94 फीसदी में शाखा का कार्य चल रहा है।

-सभी प्रांतों से 1248 कार्यकर्ता बैठक में रहे उपस्थित

त्रिदिवसीय बैठक में देशभर के सभी प्रांतों से 1248 कार्यकर्ता बैठक में उपस्थित रहे। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक का शुभारंभ सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन करके किया। इसके पश्चात सरकार्यवाह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

हिन्दुस्थान समाचार/श्रीधर

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