बेबसी: हर पल मौत थी सामने, अंधेरे बंकर में दुबकने को सब मजबूर

बेबसी: हर पल मौत थी सामने, अंधेरे बंकर में दुबकने को सब मजबूर


रायबरेली, 12 मार्च (हि.स.)। हर पल मौत सामने खड़ी थी और सब असहाय ज़मीन के नीचे अंधेरे बंकर में दुबकने को मजबूर। करीब 15 दिन किसी न किसी अनहोनी की आशंका से भरा हुआ। यह कहानी है यूक्रेन के सबसे ज्यादा युद्धग्रस्त क्षेत्र सूमी की है, जहां से पढ़ाई कर रहा एक मेडिकल छात्र शनिवार को घर लौटा।

जिले के ऊंचाहार के कोटरा बहादुर गंज निवासी अखिलेश मौर्य ने बताया कि रात बंकर के घने अंधेरे में गुजरती थी। पंद्रह दिन का यह खौफनाक मंजर जीवन में वह कभी भूल नहीं सकता। अखिलेश यूक्रेन में तीन साल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहें हैं। उन्होंने यूक्रेन का जो मंजर बताया, वो भयावह था। उनका कहना था कि उनके साथ करीब पचास छात्रों की टोली थी। रूसी हमले के बाद वहां की फिजां में केवल सन्नाटा था, खौफ था और अनहोनी की आशंकाएं भरी हुई थी। दिन में कमरे के अंदर और रात बंकर में गुजारनी पड़ती थी। इस दौरान पास ही हमला हो गया जिससे पानी की सप्लाई व्यवस्था ठप हो गई और खाने की समस्या तो थी ही अब पानी पीने की समस्या हो गई। हालांकि भारतीय दूतावास ने समय-समय पर एडवाइजरी जारी की और सब उनसे संपर्क में रहे लेकिन सबसे ज्यादा सूमी प्रभावित था, इसलिए निकलने में समय लग गया।

अखिलेश सूमी से आये उन छह सौ छात्रों में एक हैं, जिन्हें कल भारत लाया गया है। छात्र के घर पहुंचते ही उदास परिजनों के चेहरे खुशी से लाल हो गये। अखिलेश के घर पर मिलने वाले गांव और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा। छात्र अखिलेश के परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया।

हिन्दुस्थान समाचार/रजनीश

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