बांदा डीएम अनुराग का "गुस्सा": जिले में चर्चा का बन गया "हिस्सा"

विनोद मिश्रा
बांदा।
डीएम अनुराग पटेल अपने गुस्से को लेकर जिले में मशहूर हो गये हैं। लापरवाही और अनियमितता से उन्हें खासी एलर्जी हैं। भ्रष्टचार से "नफरत" उनके रग-रग में समाई सी लगती है।गुस्से का यह इजहार उनके द्वारा छापा मार विभागीय निरीक्षण कार्यक्रमों में उजागर होता रहता है।

इसी क्रम में ताजा उदाहरण विकास भवन में देखने को मिला। यहां उन्होने लापरवाह और लेट लतीफ अधिकारियों, कर्मचारियों पर शिकंजा कसा। विकास का केंद्र बना भवन दहल गया। हुआ यह की डीएम अनुराग अचानक विकास भवन पहुंच गये। उनका गुस्सा सबसे ज्यादा जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में फूटा।

यहां कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। कई को निलंबित करने की चेतावनी दी। डीएम ने पंचायत राज कार्यालय की कई फाइलें अपने कब्जे में ले लीं। इन्हें वाहन में रखाकर जांच के लिए ले गए। कई अन्य कार्यालयों का भी निरीक्षण किया।

डीएम ने विकास भवन के सभी कार्यालयों का निरीक्षण किया। अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनवाई। पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में डीएम ने देर तक निरीक्षण किया। फाइलें देखीं। वरिष्ठ सहायक कुलदीप सिंह चौहान को जमकर फटकारा।

इस कार्यालय में 5 सफाई कर्मियों को देखकर डीएम ने इन्हें तत्काल कार्य मुक्त के आदेश दिये। बिना ड्रेस वाले दो सफाई कर्मियों को अगले दिन से ड्रेस में न आने पर सस्पेंड करने की चेतावनी दी। डीएम ने कहा कि सफाई कर्मियों की निलंबन और बहाली में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलीं हैं। डीएम ने सफाई कर्मियों और पंचायत कर्मियों की सेवा पुस्तिकाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम के तेवर देखकर पूरे विकास भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप का आलम रहा। कुल मिलाकर डीएम अनुराग की प्रशानिक कार्यशैली का "राग"अधिकारियों के लिए "गाज"सा बन गया है।

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