डीएम अनुराग का फिर चला चाबुक : पूरे स्टाफ का रोका वेतन

विनोद मिश्रा
बांदा।
डीएम अनुराग की  प्रशासनिक कुशलता नरम और कठोर रुख का समन्वय बन गई है। अच्छे कार्य पर पुरुस्कार और लापरवाही पर दंड उनकी कार्य शैली की विशेषता है।
वैक्सीनेशन अभियान में  डीएम अनुराग पटेल डिंगवाही गांव में पहुंचे। महिला-पुरुषों का टीकाकरण कराया। उधर, गांव के प्राथमिक स्कूल में घटिया पठन-पाठन और अव्यवस्थाओं पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जवाब-तलब करते हुए स्कूल के सभी अध्यापकों और शिक्षामित्र का नवंबर माह का वेतन रोक दिया। तीन लोगों द्वारा टीका न लगवाए जाने पर उनके सरकारी कोटे की दुकान से राशन लेने पर रोक लगा दी।
पोषण पाठन में प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। मेन्यू में दूध-खिचड़ी थी, लेकिन सिर्फ खिचड़ी ही दी गई। शौचालय गंदा और पानी की आपूर्ति नहीं थी।
डीएम ने बच्चों से गिनती सुनी। दो बच्चे ही सौ तक गिनती सुना पाए। 66 में सिर्फ 21 बच्चों को पहाड़े याद थे। गणित काफी कमजोर मिली। एक बालिका को छोड़कर अन्य बच्चे पांच करोड़ के अंक नहीं लिख पाए।
इन अव्यवस्थाओं पर डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही स्कूल के सभी अध्यापकों और शिक्षामित्र का नवंबर माह का वेतन,मानदेय रोक दिया। डिप्टी कलेक्टर सौरभ यादव, बाल विकास परियोजना अधिकारी राम प्रकाश आदि साथ में उपस्थित रहे।

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