रमा एकादशी आज: व्रत करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और मिलता है मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है।

परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है।

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महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज ने कहा।

कार्तिक मास में पड़ने वाली पहली एकादशी रमा एकादशी को रंभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है। कहते हैं कि इस दिन मां लक्ष्मी के रमा स्वरूप की पूजा की जाती है। रमा एकादशी का व्रत करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होता और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हिंदू धर्म में एकदशी को बेहद पवित्र माना गया है.।कहते हैं कि एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सबसे कठिन होता है. लेकिन एकादशी के व्रत जितना फल किसी और व्रत में नहीं है. मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और इस जन्म में सुख भोग कर मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. हर माह में दो एकादशी पड़ती हैं और सभी एकादशी को महत्व अलग होता है. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाता है।

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