किशोर समी की त्वचा का दुर्लभ प्रत्यारोपणः आ गया था हाई वोल्टेज की चपेट में, 70 प्रतिशत झुलस गई थी स्किन

मुरादाबाद। संत कबीर दास कह गए हैं, जाको राखै साईंया, मार सकै न कोय…। यह प्रख्यात पंक्ति कटघर के किशोर मो. समी पर सटीक उतरी। दरअसल तीन माह पूर्व कटघर के मो. हनीफ का तेरह बरस का बेटा मो. समी हाई वोल्टेज की चपेट में आ गया था। इस हादसे में वह 70 प्रतिशत अपनी त्वचा गवां बैठा। एक टांग मुकम्मल जबकि दूसरा पैर की जांघ ही महफूज रही। यह किशोर एक माह तक कहीं और ट्रीटमेंट कराता रहा, लेकिन इम्प्रूवमेंट के स्थान पर हालत और बिगड़ती चली गई। एक महीने बाद मो. हनीफ ने अपनों की सलाह और उम्मीदों के संग अपने लाड़ले को तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।

जाने -माने प्लास्टिक सर्जन डॉ. अनिल राजपूत ने प्रारम्भिक जांच के बाद रोगी समी के परिजनों की काउंसलिंग की, क्योंकि समी के शरीर पर इतनी चमड़ी नहीं थी कि उसके जख्मों को दुरूस्त किया जा सके। ऐेसे में बडे़ भाई आमिर की स्किन प्रत्यारोपित करने का फैसला लिया गया। तीन दुर्लभ ऑपरेशन और प्रत्यारोपण के बाद छठी क्लास के छात्र समी को नई जिंदगी मिल गई है।

प्रख्यात प्लास्टिक सर्जन डॉ. राजपूत और उनकी टीम ने करीब दो माह से भर्ती समी का 06 अक्टूबर को तीसरा ऑपरेशन किया। बकौल डॉ. राजपूत विशेषकर भारत में स्किन ग्र्राफ्टिंग ट्रांसप्लांटेशन दुर्लभतम है। डॉ. राजपूत को प्लास्टिक सर्जरी का 22 बरस का लंबा अनुभव है। तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल में 09 साल से तैनात डॉ. राजपूत देश-विदेश में अब तक सोलह हजार ऑपरेशन कर चुके हैं। टीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की मेहनत और समी के परिजनों की दुआएं अंततः रंग लाई हैं। समी अब टीएमयू हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो चुका है। समी के वालिद, अम्मी और बड़ा भाई टीएमयू हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम का बार-बार शुक्रिया अदा करते हैं। ग्रुप चेयरमैन सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, हॉस्पिटल के निदेशक प्रशासन, निदेशक पीएनडी विपिन जैन, निदेशक हॉस्पिटल अजय गर्ग कहते हैं, हमें डॉ. अनिल राजपूत पर नाज है।

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