प्रशासन रहे सावधान : कानून व्यवस्था का सवाल बन सकती है खाद!

विनोद मिश्रा
बांदा।
जिले में खाद की कमी के हालात जल्द नहीं बदले तो यह कानून व्यवस्था का सवाल बन सकती है! खरीफ सीजन में कुदरत के हाथों छले गए किसान रबी से आस लगाए हुए हैं। यही वजह है कि चालू सीजन खत्म होने से पहले ही उन्होंने आगामी फसल की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में किसानों के बीच खाद हासिल करने के लिए मारामारी की स्थिति मची हुई है। सरकारी बिक्री केंद्रों पर खाद हासिल करने के लिए किसानों को बड़े सवेरे से ही कतार लगानी पड़ती है फिर भी निराशा हाथ आती है।

पिछले दिनों खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों ने जाम भी लगाया था। हालात किसानों को सहूलियतें देने के तमाम बड़े-बड़े दावों की पाले खोलते नजर आ रहे हैं। ये स्थिति तब है जब रबी सीजन शुरू नहीं हुआ है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में खाद की मांग में भारी इजाफा हो सकता है। किसानों के बीच मारामारी की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे निपटने के लिए शासन-प्रशासन को अभी से ही खाद की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। वितरण के पुख्ता इंतजाम बनाने होंगे।

विदित हो कि चालू खरीफ सीजन में मौसम की बेरुखी की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। किसान रबी सीजन से आशान्वित हैं। यही वजह है कि सीजन की शुरुआत से पहले ही खाद के लिए मारामारी मचने लगी है।
पुलिस अधीक्षक अभिनंदन का कहना है की पुलिस खाद वितरण में प्रशासन का पूरा सहयोग कर रही है। आगे व्यवस्था को और भी चुस्त-दुरुस्त बनाया जाएगा। खाद वितरण केंद्रों के बाहर पुलिस के बंदोबस्त रहेंगे।

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