वर्चुअली टीचिंग में फीडबैक, एक्टिविटी, इंडिविजुएलिज्म और रेलीवेंस अनिवार्य

मुरादाबाद। यूएसए की ओकलैंड यूनिवर्सिटी से डाॅ. वार्ना तारानिकांति ने मैक्सीमिजिंग डिजिटल लर्निंग अपार्चुनिटी टू प्रमोट काॅलाबोरेटिव लर्निंग एमंग स्टुडेंट्स पर बोलते हुए कहा, कोविड महामारी के दौरान एनाॅटमी टीचर्स ने फाइव डब्ल्यू वन एच का बखूबी सामना किया है। 

उन्होंने विस्तार से बताया, कोविड के दौरान एनाॅटामी के टीचर्स और स्टुडेंट्स कब, कैसे और कहां स्टडी करें? इन्हीं बिन्दुओं को लेकर उन्होेंने व्याख्यान के दौरान एक पोलिंग भी कराया, हांलाकि इसकी फाइंडिग का खुलासा बाद में होगा। वर्चुअली क्लासेज को और इफेक्टिव बनाने के लिए उन्होंने कहा, टीचर्स को स्टुडेंट्स के साथ फेयर होना ही चाहिए। इसके लिए उन्होंने चार मुख्य बिन्दुओं- फीडबैक, एक्टिविटी, इंडिविजुएलिज्म और रेलीवेंस पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। अंत में उन्होंने एक मुहावरे- जहां चाह, वहां राह को कोट करते हुए कहा, यदि आप वर्चुअली क्लासेज को आत्मसात करोगे तो आॅनलाइन स्टडी भी उम्दा लगेगी। डाॅ. वार्ना तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एनाटॉमी विभाग की ओर से शरीर रचना विज्ञान में विकसित रुझानः एक वैश्विक नजरिया-2021 थीम पर आयोजित दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय वर्कशॉप के समापन मौके पर बतौर स्पीकर बोल रही थीं। इससे पूर्व एनाटाॅमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया- एएसआई के प्रेसीडेंट प्रो. ब्रिजेन्द्र सिंह और एएसआई के जनरल सेकेट्री डाॅ. सुंदर लाल जेठानी ने अपने वीडियो संदेश में हार्दिक बधाई देते हुए कहा, आईडब्ल्यूए-2021 वर्कशाॅप रिसर्चर्स के लिए बहुउपयोगी साबित होगी। 

आईडब्ल्यूए-2021 के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन एवं टीएमयू मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. एसके जैन और वर्कशॉप की ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. निधि शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रो. जैन ने बताया, यह वर्कशॉप एनाटॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के संरक्षण में हुई। अंत में इस अंतर्राष्ट्रीय वर्कशाॅप में भाग लेने वाले स्पीकर्स, पैनेलिस्ट और मोडरेट्स को सर्टीफिकेट्स भी वितरित किए गए।

एम्स नई दिल्ली में एनाॅटामी विभाग के एचओडी प्रो. ए शरीफ ने ब्लैंडेड लर्निंग इन एनाॅटामी पर बोलते हुए कहा, ब्लैंडेड लर्निंग फिजिकल प्रजेंस और इंटरनेट दोनों का संगम है। ब्लैंडेड मोड टीचिंग में मीडियम सबसे अहम है। इसको चुनने के लिए उन्होंने चार प्राथमिकताएं गिनाईं। ब्लैंडेड टीचिंग में यूज होने वाले एप्स और उनके तरीकों के बारे में भी बताया। उल्लेखनीय है, कोरोना के वक्त से एम्स में ब्लैंडेड टीचिंग इन्हीं मैथ्ड पर हो रही है। प्रो. शरीफ ने ब्लैंडेड टीचिंग को श्रेष्ठ विकल्प बताते हुए कहा, एम्स में हमने वर्चुअली टीचिंग और स्टडी को आसान बनाने के लिए रोटेशनल माॅडल, फ्लैक्स माॅडल, सेल्फ ब्लैंडिंग माॅडल, एनरिच वर्चुअल माॅडल आदि लागू कर रखे हैं। अंतर्राष्ट्रीय वर्कशॉप के अंतिम दिन टर्की केे प्रो. कैगटे बरुत, भारत के डॉ. डोरिस जी योहानन, यूके की डॉ. सिसिलिया ब्रेसेट, अमेरिका की डॉ. प्रीति एम. मिशेल, भारत की प्रो. नवबीर पसरीचा ने बतौर स्पीकर्स व्याख्यान दिए, जबकि बतौर एडवाइजर प्रो. सीमा अवस्थी, प्रो. विश्राम सिंह, प्रो. वीके सिंह, प्रो. रिहाना नजम, प्रो. प्रीथपाल मटरेजा, प्रो. रोहित वाष्र्णेय आदि शामिल रहे। वर्कशॉप में डॉ.हिना नफीस, डॉ. सोनिका शर्मा, डॉ.दिलशाद उस्मानी, डॉ.सौरभ चैधरी आदि की भी मौजूदगी रही। वर्कशॉप से दुनिया के 1500 डेलीगेट्स जुड़े रहे। संचालन डॉ. सुप्रीति भटनागर ने किया।

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