भगवान पुष्पदंत मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर चढ़ाए गए लाडू

उत्तम सत्य के दिन तीर्थंकर महावीर जिनालय में आस्था रूपी ज्ञान गंगा में सैकड़ों श्रावक और श्राविकाओं ने डुबकी लगाई। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य मिला आदित्य जैन को। कुलाधिपति परिवार को मिला स्वर्ण कलश से शांतिधारा करने का सौभाग्य। विधानाचार्य श्री ऋषभ जैन बोले, जैसा देखा – समझा, वैसा ही बोलो। जैन रक्षाबन्धन कथा के जरिए दर्शाया जैन रक्षाबन्धन का महत्व। तृतीय वर्ष के अपूर्व शर्मा चुने गए अवार्ड ऑफ द डे

मुरादाबाद। उत्तम सत्य के दिन तीर्थंकर महावीर जिनालय में आस्था रूपी ज्ञान गंगा में सैकड़ों श्रावक और श्राविकाओं ने डुबकी लगाई। दशलक्षण महापर्व पर भगवान पुष्पदंत मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं लाडू समर्पण का विशेष कार्यक्रम हुआ। मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया, जिसमें लाडू सर्मपण करने का सौभाग्य फार्मेसी फैकल्टी आदित्य विक्रम जैन, श्रीमती प्रीति यादव जैन, आशीष सिंघई और वैभव जैन को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही लाडू समर्पण करने का सौभाग्य सीसीएसआईटी की छात्राएं सिमरन जैन, स्वासी जैन, अतिशा जैन, निकिता जैन, अंशिका जैन, स्नेहा जैन, भविता जैन, आस्था जैन और विधि जैन को प्राप्त हुआ।

पर्वाधिराज पर्यूषण महोत्सव के पांचवें दिन प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य आदित्य जैन और द्वितीय स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य तनिश जैन, तृतीय स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य गौतम जैन, चतुर्थ स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य तनिष्क जैन को मिला। एक ओर से स्वर्ण कलश से शांतिधारा करने का सौभाग्य कुलाधिपति सुरेश जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन और एमजीबी अक्षत जैन और रजत कलश से शांतिधारा करने का सौभाग्य डॉ. अश्विनी जैन को प्राप्त हुआ। इस मौके पर फर्स्ट लेडी श्रीमती बीना जैन और उनकी पुत्रवधू श्रीमती ऋचा जैन की उपस्थिति रही।

टीएमयू ऑडी में आयोजित कल्चरल इवनिंग में तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर – टीएमडीसीआरसी के जैन स्टुडेंट्स की जैन रक्षाबन्धन कथा की प्रस्तुति जानदार और शानदार रही। अवार्ड ऑफ द डे तृतीय वर्ष के अपूर्व शर्मा चुने गए। मुनियों की रक्षा पर केन्द्रित यह कथा नरेटर अनुष्का जैन के जरिए आगे बढ़ी। दरअसल इस कथा के माध्यम से यह दर्शाया गया, जैन धर्म में रक्षा बन्धन क्यों मनाया जाता है? कभी राजा वर्मा (प्रीतम कुमार) जैन मुनियों का बेहद सम्मान करते थे लेकिन उनके चारों मंत्री – बली, बृहस्पति, नमोची और प्रहलाद अपने राजा के विपरीत मुनियों से कठोर व्यवहार करते थे। इन मंत्रियों का वश चलता तो वह हिंसा से भी नहीं चूकते थे। राजा के बार-बार आदेश के बावजूद इन मंत्रियों ने अपने कठोर व्यवहार को नहीं बदला। राजा ने एक दिन स्वयं अपने सामने अत्याचार होते हुए देख लिया तो गुस्से में आगबबूला होकर सभी को बर्खास्त कर दिया। इनमें से एक बली नाम का मंत्री अपनी धूर्तता के चलते पड़ोसी राज्य का राजा बन गया लेकिन मुनियों पर अत्याचार नहीं छोड़ा। एक दिन बली के सिपह सलारों ने मुनि अकम्पनाचार्य और उनके सात सौ शिष्यों को जला दिया, तो मुनि विष्णु कुमार के आदेश पर राजा और तीनों मंत्रियों को अंतत: झुकना पड़ा। उन्होंने फिर मुनियों को न केवल आग से बचाया बल्कि मुनियों का सम्मान करने लगे। इस ऐतिहासिक घटना के बाद जैन समुदाय में रक्षा बन्धन का मतलब मुनियों की रक्षा करना है। मुनियों की भूमिका संयम जैन, मनन बडाला, अरहन्त जैन, आदित्य सैठी आदि जबकि मंत्रीयों के रोल में श्रांश जैन, हर्षित सेठी, ध्रुव त्यागी, अंकित पटेल आदि ने अविश्मरणीय भूमिका निभाई। जैन रक्षा बन्धन कथा के अलावा भक्तिनृत्य और कविता भी हुई। भक्तिनृत्य के तहत अपूर्व शर्मा, युगी जैन, आयुषी जैन, वंशिका जैन, रिया जैन, अरहन्त जैन, आदित्य सैठी आदि ने मंगलाचरण की मनमोहिनी प्रस्तुति दी। इसके अलावा गरबा, डांडिया भी हुए। डॉ. प्रतीक बंब, डॉ. अनुभा जैन, डॉ. रंगोली, राशी जैन, कृति जैन, रौनक जैन, हिमानी जैन, फरहा उसमान, अंजलि, आशी जैन, इपिका जैन, वर्षाली जैन, पार्खी जैन, श्रृद्धा जैन आदि ने भक्ति गीतों पर गरबा प्रस्तुत किया। निदेशक प्रशासन अभिषेक कपूर, डेंटल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मनीष गोयल, मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉ. एसपी जैन, पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की एसओडी प्रो. सीमा अवस्थी, टिमिट के निदेशक विपिन जैन, कल्चरल कमेटी की कॉर्डिनेटर डॉ. अंकिता जैन, डॉ. रिषिका आदि इस सांस्कृतिक सांझ के गवाह बने। कार्यक्रम में राजीव जैन, श्रीमती लता जैन भी उपस्थित रहे।

उत्तम सत्य का महत्व और अर्थ बताते हुए सम्मेद शिखर जी से आए विधानाचार्य श्री ऋषभ जैन बोले, जीवन में हर काम शुद्धि से करना चाहिए। मन, वचन और काय की शुद्धि पर प्रकाश डालते हुए बोले, मन की शुद्धि भावनाओं, वचन की शुद्धि बोलचाल और हर काम शुद्धता से होनी चाहिए। चाहे भोजन हो या वेशभूषा। जो बुरा लग जाए वो सत्य नहीं हो सकता जैसे- सत्यम् शिवम् सुन्दरम्। कुछ भी बोलने से पहले सामने वाले व्यक्ति को परख लो, परिअतिथियोम के अनुरूप शब्द बोलो। जैसा देखा – समझा, वैसा ही बोलो। अगर किसी के प्राण जाते हैं तो परिस्थितियों के आधार पर बोलो, जो सबको प्रिय लगे। पंडित श्री ऋषभ जैन ने आज का नियम देते हुए कहा कि मन, वचन और काय से आज झूठ नहीं बोलना है। प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन ने कहा कि आज हम सबके लिए दोहरी खुशी का दिन है, क्योंकि 14 सितंबर, 2008 को तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। भगवान पुष्पदंत मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर प्रतिष्ठाचार्य बोले, किसी भी तीर्थंकर के जन्म पर न केवल 6 महीने पहले से लेकर 9 महीने बाद तक रत्नों की बरसात होती है, बल्कि नरक में भी एक पल के लिए शांति हो जाती है। दिल्ली से आई सरस एंड पार्टी की मधुर साज और आवाज ने रिद्धि-सिद्धि भवन को भक्तिमय बना दिया, …हे नाथ तेरी बीतराग छवि को प्रणाम….., आएं हो पुजारी पूजा करने को……., चलते-चलते मेरे भजन याद रखना……, अब ना करेंगे मन वाणी हृदय धरेंगे जिनवाणी…., पंखिड़ा ओ पंखिड़ा….., भगवान मेरी नईया उस पार लगा देना…., महावीर की मूर्ति ऐसी चमकी जैसे हीरा मोती….. सरीखे भजनों पर सैकड़ों श्रावक और श्राविकाएं हाथों में चंवर लिए जमकर झूमे। इस मौके पर प्रो. आरके जैन, डॉ. अर्चना जैन, रत्नेश जैन, डॉ. विनोद जैन आदि भी मौजूद रहे।

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