पति को मुखाग्नि देकर निभाया संगिनी का फर्ज

सागर। पति की अंतिम यात्रा में पत्नी के शामिल होने पर समाज को एतराज होता है। मप्र के सागर शहर में इस रिवाज से इतर लोगों ने पत्नी द्वारा मुखाग्नि देने की इच्छा को सहज स्वीकार कर बदलते परिवेश की इबारत लिखी।

दरअसल सागर के मोती वार्ड निवासी 77 वर्षीय विश्वनाथ परांजपे का गत दिवस निधन हो गया। मूलत: बिलासपुर के रहने वाले विश्वनाथ सेना में लेखापाल के पद से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के चलते वे सागर आए और यहीं बस गए। उनकी कोई संतान नहीं होने से परिवार के नाम पर जीवन संगिनी 73 वर्षीय मीनाक्षी परांजपे ही हैं। शमशान घाट पर जब मुखाग्नि का समय आया तो लोग यह तय नहीं कर पाए कि यह फर्ज कौन पूरा करे। ऐसे में विश्वनाथ की पत्नी मीनाक्षी ने स्वयं ही यह कर्तव्य पूरा करने की बात रखी। जिसे लोगों से सहज स्वीकार किया। 

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