हाल ही में संसद में हुए बुरे बर्ताव से दुखी हूं: नायडू

बेंगलुरु। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बुधवार को संसद और राज्य विधानसभाओं में हुए व्यवधानों पर अपनी पीड़ा व्यक्त की और जनप्रतिनिधियों से सार्वजनिक जीवन में गरिमा बढ़ाने और युवा पीढ़ी से आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करते हुए उदाहरण स्थापित करने का आह्वान किया।

बेंगलुरु में एम.एस. रमैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष एम. आर. जयराम को सर एम विश्वेश्वरय्या मेमोरियल अवार्ड प्रदान करने के उपरांत अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति, जो राज्यसभा के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि वे इस बुरे बर्ताव से दुखी हैं। हाल ही में संसद में और कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों की विधानसभाएं इस तरह के व्यवहार की साक्षी रही हैं। विशेष रूप से संसद में हाल की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का उल्लेख करते हुए  नायडू ने कहा कि वह कुछ सदस्यों के बुरे बर्ताव से दुखी हैं।

कुछ सांसदों के अशोभनीय व्यवहार को नकारते हुए नायडू ने कहा कि विधानसभाएं और संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि बहस, चर्चा और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए होती हैं। असहमति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप किसी को बलपूर्वक मजबूर नहीं कर सकते।

उपराष्ट्रपति ने इच्छा जताई कि विभिन्न स्तरों पर उपस्थित विधायक बहस और चर्चा की गुणवत्ता में सुधार लाएं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में इससे माहौल और बेहतर बनाया जा सकेगा।

सर एम विश्वेश्वरय्या जैसे महान लोगों से प्रेरणा लेते हुए उपराष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी से देश की प्रगति में तेजी लाने के लिए नवाचारों और नए विचारों के साथ आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गरीबी उन्मूलन, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और एक आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते हुए एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने चुने हुए क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने का भी आह्वान किया।
विश्वेश्वरय्या को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उन्हें आधुनिक भारत का महान निर्माता-इंजीनियर बताया। मैसूर में कृष्णा सागर बांध और हैदराबाद में बाढ़ सुरक्षा प्रणाली जैसी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को तैयार करने में उनके योगदान को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उनकी अभियांत्रिक प्रतिभा के लिए एक श्रद्धांजलि है जिसे हम हर वर्ष 'अभियंता दिवस' के रूप में उनकी जयंती के तौर पर मनाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने मैसूर के दीवान के रूप में भद्रावती, मैसूर सोप फैक्ट्री और मैसूर चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयरन एंड स्टील प्लांट जैसे कई ऐतिहासिक संस्थानों की स्थापना में विश्वेश्वरय्या के दृष्टिकोण को भी याद किया। विश्वेश्वरय्या ने आजादी से पहले ही भारत में औद्योगीकरण आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उनके बहुमुखी व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एम. विश्वेश्वरय्या एक नए आधुनिक भारत की क्षमताओं, आकांक्षाओं और प्रतिभा के प्रतीक थे।
एम.एस. रमैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. एम. आर. जयराम को 'सर एम विश्वेश्वरय्या मेमोरियल अवार्ड' प्रदान करते हुए नायडू ने एम.एस. रमैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को राज्य में नवाचार को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सक्षम शैक्षिक केंद्र के रूप में इसकी सराहना की।
इस पुरस्कार समारोह का आयोजन बेंगलुरु में विधान सौधा के बैंक्वेट हॉल में किया गया था। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, लोकसभा सांसद पीसी मोहन, एफकेसीसीआई के अध्यक्ष पेरिकल एम सुंदर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Post a Comment

0 Comments