पुलिस नहीं दोस्त बनकर करें बच्चों से बात

अज़हर उमरी
कानपुर।  
बच्चों से जुड़े अपराधों के संबध में जब उनसे बात करें तो पुलिस अधिकारी नहीं बल्कि उनके दोस्त बन जाएं। इससे बच्चे अपनी सारी बात आपको बताएंगे, जोकि आपकी विवेचना के दौरान आपको काम आएगी। यह बात पुलिस लाइन में चली तीन दिन की कार्यशाला में बाल समिति बोर्ड के पूर्व सदस्य ने कही।

बाल संरक्षण अधिनियम विषय पर हुई तीन दिवसीय कार्यशाला में 25 को पूर्वी , 26 को पश्चिमी और 27 को दक्षिणी जोन के पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग हुई। प्रशिक्षण देने के लिए बाल समिति बोर्ड के पूर्व सदस्य गिरीश अवस्थी, यूनीसेफ के मंडलीय तकनीकी सलाहकार राजेश सैनी, मनोविज्ञान विभाग की रिसर्च एसोसिएट प्रियंका यादव, क्राइम ब्रांच के एसआई पुनीत तोमर ने अलग-अलग सत्रों में संबोधित किया। सेमिनार में प्रभारी निरीक्षक, एसआई बाल कल्याण, हेड मोहरिर, महिला कांस्टेबल को प्रशिक्षण दिया गया। 

प्रशिक्षण में सभी को बाल अपराध से जुड़े मामलों की विवेचना पूरी संवेदनशीलता के साथ करने के लिए सिखाया गया। शुक्रवार को प्रशिक्षण का समापन हो गया। समापन अवसर पर डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल, एडीसीपी लाइन  बसंत लाल व अन्य अधिकारी शामिल हुए।

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