यूपी समेत 11 सूबों की महिलाएं सीख रही हैं उद्यमिता की बारीकियां

मुरादाबाद। डॉ. रिचा यूनीक क्लीनिक एंड एकेडमी, यूनीक इंटरनेशनल, नागपुर की ओनर डॉ. ऋचा राजकुमार जैन ने आइडिया इवैल्यूएशन पर बोलते हुए कहा, नवीनता के पांच पहलू हैं – कार्यक्रम नवाचार, तकनीकी नवाचार, संगठनात्मक नवाचार, प्रबंधकीय नवाचार और पद्धतिगत नवाचार, जबकि विचार का मूल्यांकन चार मापदंडों – मौलिकता, व्यवहार्यता, विपणन योग्य और लाभ पर आधारित होना चाहिए। नवाचार समाज के लिए अति महत्वपूर्ण है। हमें देखना होगा, पहले से मौजूद समाधानों की तुलना में हम नया क्या हल प्रस्तुत कर रहे हैं? उन्होंने वास्तविक जीवन के उदाहरणों को तथ्य के रूप में उद्धृत किया। किसी भी विचार में नवाचार तत्व सफलता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वास्तविक तथ्यों के बारे में जानने के लिए केस स्टडी की जरुरत है। जिस डोमेन को हम एक्सप्लोर करना चाहते हैं, उसके बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। ग्राहकों की जरूरतों को स्पष्ट रूप से पहचाना जाना चाहिए। ग्राहकों को कौन से उत्पाद या सेवा की पेशकश की जानी चाहिए, इसकी शिनाख्त की दरकार है। उपयुक्त व्यवसाय मॉडल लागू किया जाना चाहिए। विपणन तत्व अगला क्षेत्र है, जिस पर उद्यमी की सफलता निर्भर करती है। विपणन श्रृंखला की पहचान करने की आवश्यकता है। उपयुक्त साधनों और विधियों का चयन सफलता में योगदान देता है। विचारों को ठीक से पहचाना और व्यवस्थित किया जाना चाहिए। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज-एफओईसीएस की ओर से ऑनलाइन आयोजित विमन इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट प्रोग्राम- डब्ल्यूईडीपी में बोल रही थीं। चार सप्ताह तक चलने वाली डब्ल्यूईडीपी का शुभारम्भ यूपी की उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री माननीया श्रीमती नीलिमा कटियार ने बतौर मुख्य अतिथि किया था। इस मौके पर टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन की भी गरिमामयी मौजूदगी रही। एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने बताया, एफओईसीएस यह डब्ल्यूईडीपी नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंटरप्रिन्योरशिप डवलपमेंट बोर्ड-एनएसटीईडीबी, डिपार्मेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी- डीएसटी और मिनिस्ट्री ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वित्तीय सहयोग से करा रहा है। महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम में यूपी के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक आदि 11 प्रदेशों की प्रतिभागी ट्रेनिंग ले रही हैं।

टीएमयू की एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. मंजुला जैन ने सॉफ्ट स्किल डवलपमेंट: कम्युनिकेशन, इंफॉर्मेशन सीकिंग ब्रेक पर चर्चा करते हुए संचार कौशल और आवश्यकताओं के प्रत्येक पहलुओं को विस्तार से समझाया। डॉ. जैन बोलीं, संचार उद्यमशीलता की सफलता की कुंजी है। उन्होंने वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में विभिन्न प्रकार के आवश्यक संचार और सॉफ्ट स्किल्स पर जोर दिया। आईएमएस गाजियाबाद की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरभि सिंह ने बाजार सर्वेक्षण को लेकर फीडबैक पर अपने व्याख्यान की शुरुआत आर्थिक जरूरतों से की। उन्होंने इस पर भी प्रकाश डाला कि मानव सभ्यता के क्रमिक विकास के साथ हमारी आर्थिक जरूरतें किस तरह बदली और आगे कैसे बदलेंगी। उन्होंने एक साधारण डिजाइन से लेकर उत्पाद के विभिन्न डिजाइनों के अपडेशन पर भी प्रकाश डाला। नमूनाकरण प्रक्रिया के विस्तृत विश्लेषण के साथ-साथ विभिन्न मार्केटिंग टूल्स पर भी बोलीं। किसी भी उत्पाद को लॉन्च करने के लिए विभिन्न सर्वेक्षण विधियों का विस्तार से वर्णन किया। स्कूल ऑफ एग्री बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋतंभरा सिंह ने उत्पाद योजना और उत्पाद मिक्सिंग स्ट्रैटेजी पर व्याख्यान दिया। उन्होंने परियोजना उत्पाद और उत्पाद मिश्रण की रणनीतियों और सिद्धांतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद डॉ. ऋतंभरा सिंह ने डेटा और स्लाइड्स की मदद से उत्पाद योजना की अवधारणा को समझाया कि यह व्यवसाय पर कैसे प्रभाव डालता है।

एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने उम्मीद जताई, उद्यमियों के रूप में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से भारत की अर्थव्यस्था और सुदृढ़ होगी। उद्यमिता के क्षेत्र में महिला उद्यमियों की अधिक से अधिक भागीदारी के लिए सरकारी योजनाओं के अलावा टीएमयू के स्तर पर भी यथा संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अनेक सफल महिला उद्यमियों- वन्दना लूथरा, राधा भाटिया, शिखा शर्मा और इंदिरा नूई के प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। मातृत्व डेयरी फार्म, जयपुर-राजस्थान की ओनर सुश्री अंकिता कुमावत ने अपने डेयरी फार्म की केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए कहा, डेयरी फॉर्म कैसे स्थापित करें, नई परियोजना तैयार करने के लिए आवश्यक उपाय और योजना से संबंधित अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने विभिन्न निवेश और विपणन रणनीतियों, वित्त पोषण, लाइसेंसिंग और सरकारी नीतियों के बारे में भी सुगम रास्ते सुझाए। उन्होंने डेयरी फार्म विकसित करने के लिए प्रमुख चुनौतियों और उसके लिए सर्वोत्तम संभव समाधानों के बारे में चर्चा की। सुश्री कुमावत ने ट्रेनिंग ले रहीं प्रतिभागियों से संवाद किया और अपने अनुभव साझा किए। चितकारा यूनिवर्सिटी, पंजाब की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. किरण सूद ने बिजनेस मॉडल और इटरेटिंग द मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (एमवीपी) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विभिन्न व्यवसाय मॉडल जैसे सदस्यता मॉडल, फ्रीमियम मॉडल, लीजिंग मॉडल, ई-कॉमर्स मॉडल और कई अन्य के बारे में चर्चा की। लीन मैनेजमेंट, रेवेन्यू मॉडल, बेसिक बिजनेस ऑपरेशन मॉडल और विभिन्न अन्य क्षेत्रों की अवधारणा पर प्रकाश डाला, जो एक उद्यमशीलता की यात्रा शुरू करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

टीएमयू की संयुक्त रजिस्ट्रार-आरएंडडी डॉ. वैशाली ढींगरा ने महिला उद्यमियों में विश्वास निर्माण को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा, उद्यमी के लिए एक बड़ी चुनौती कार्य-जीवन संतुलन भी है। उन्होंने सवाल उठाया, उद्यमियों में विशेष रूप से महिलाओं के लिए अपने भीतर सच्चे आत्मसम्मान की तलाश करना इतना महत्वपूर्ण क्यों है? उन्होंने महिला उद्यमियों की विशेषताओं की चर्चा करते हुए कहा, एक सफल महिला उद्यमी बनने के लिए उन्हें इस सवाल का जवाब तलाशना होगा। आईसीटी की सलाहकार और एकेडेप्रो सर्विसेज एंड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और निदेशक श्रीमती रश्मि जैन ने खोज और निर्माण टीम और विस्तार परियोजना रिपोर्ट तैयार करना विषयों पर चर्चा की। उन्होंने नवरत्न की अवधारणा को भी स्पष्ट किया। उन्होंने व्यवसाय प्रबंधन, आविष्कार, नवप्रवर्तन, उद्यमशीलता में व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए वास्तविक जीवन की समस्याओं और उनके समाधान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आकाश में वी-आकार में उड़ने वाले पक्षियों के उदाहरण के माध्यम से टीम के महत्व को समझाते हुए कहा, वह स्वयं भी आमतौर पर टीम की इस रणनीति का पालन करती हैं। डॉ. रश्मि ने विस्तार परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की अवधारणा को भी स्पष्ट किया।

एफओई-टीएमयू, मुरादाबाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की एचओडी डॉ. गरिमा गोस्वामी ने फैक्ट्री विजिट पर चर्चा की। उन्होंने एक ट्रांसफॉर्मर कंपनी का वर्चुअल टूर किया। उन्होंने ट्रांसफार्मर के हर पहलू के बारे में बताया। ट्रांसफार्मर की मूल बातें, उसके संचालन, उसकी सुरक्षा और अन्य विशेषताओं को शामिल किया। ट्रांसफार्मर का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और इसका अनुप्रयोग घरेलू से लेकर औद्योगिक और बिजली क्षेत्र के संचालन तक होता है। इसमें निवेश की बहुत बड़ी गुंजाइश है और एक उद्यमी इसमें निवेश कर सकता है। जेंडर और वित्तीय समावेशन, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक-सिडबी की थीम लीडर सुश्री सुरुचि अग्रवाल ने प्रौद्योगिकी और ज्ञान आधारित उद्यमिता और स्थिरता पर व्याख्यान दिया। सुश्री सुरुचि मानवाधिकारों, लैंगिक समर्थन, नीति परामर्श, संकट प्रतिक्रिया प्रबंधन और वित्तीय समावेशन से संबंधित मुद्दों पर काम करती हैं। वह एक सामाजिक विकास पेशेवर हैं, जिनके पास जेंडर को मुख्यधारा में लाने और जेंडर आधारित हिंसा के खिलाफ वकालत करने का अनुभव है। वह वर्तमान में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के साथ थीम लीडर – जेंडर और वित्तीय समावेशन के रूप में काम कर रही हैं और पहले यूएनडीपी, यूएनएफपीए और केंद्रीय मंत्रालयों जैसे संगठनों के साथ काम कर चुकी हैं। अपने संबोधन में उन्होंने सतत विकास के 17 लक्ष्यों के संबंध में उद्यमशीलता के दृष्टिकोण पर चर्चा की। आई.के. हस्तशिल्प, मुरादाबाद की ओनर सुश्री आकांक्षा गर्ग ने इफेक्चुएशन और लीन स्टार्टअप पर चर्चा करते हुए कहा, अगर हम भविष्य में क्या होगा, इस बारे में बहुत अधिक चिंतित होंगे कि हम अपने उद्यम में सफल होंगे या नहीं, तो हम कभी भी कोई व्यवसाय शुरू नहीं कर पाएंगे। किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले हमें अपने उद्यम की बाजार परिभाषा के बारे में पता होना चाहिए। यानी यह एक छोटे पैमाने का व्यवसाय है या एक बड़ी विनिर्माण इकाई आदि। अगर हम अपने लक्षित ग्राहक के बारे में जानेंगे तो हम अपना व्यवसाय बेहतर तरीके से चला पाएंगे। उन्होंने प्रभाव के सिद्धांतों पर भी विस्तार से चर्चा की। लीन स्टार्टअप के बारे में भी बताया, यह कैसे नवोदित उद्यमियों की मदद कर सकता है।

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