करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां गंगा : स्वामी कैलाशानंद गिरी

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मां गंगा : स्वामी कैलाशानंद गिरी

हरिद्वार 18 जून (DVNA)। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि मां गंगा करोड़ो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

गंगा के प्रति आस्था रखने के साथ श्रद्धालुओं को गंगा को स्वच्छ, निर्मल, अविरल बनाए रखने का संकल्प भी लेना चाहिए। श्री दक्षिण काली मंदिर में श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि गंगा दशहरे के शुभ अवसर पर सभी श्रद्धालु कोविड नियमों का पालन करते हुए घर पर रहकर ही मां गंगा का ध्यान करें और गंगा को स्वच्छ, निर्मल व अविरल बनाए रखने का संकल्प लें। युगों युगों से अविरल बह रही मां गंगा पूरे जगत का कल्याण करती है। लेकिन मानवीय गलतियों के चलते गंगा में प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में सभी का दायित्व है कि विश्व की सबसे पवित्र नदी मां गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि राजा भगीरथ के हजारों वर्ष तपस्या करने के बाद जनकल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई मां गंगा के जल के दर्शन व आचमन करने मात्र से ही सभी पापों से निवृत्ति हो जाती है औेर मोक्ष की प्राप्ति होती है। देश विदेश से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आते हैं। ऐसे में सभी का कर्तव्य है कि किसी भी प्रकार की गंदगी व कपड़े गंगा में ना डालें। गंगा घाटों को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। सभी के सहयोग से ही गंगा को स्वच्छ व निर्मल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संत समाज गंगा स्वच्छता के प्रति संकल्पबद्ध है। धर्मनगरी हरिद्वार में देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को संत महापुरूषों द्वारा गंगा स्वच्छता का संकल्प अवश्य दिलाया जा सकता है। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि रविवार को गंगा दशहरे का पवित्र पर्व है। गंगा दशहरे पर्व देश भर से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार के गंगा तटों पर एकत्र होत हैं और गंगा स्नान व पूजा अर्चना कर कल्याण की कामना करते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष सभी श्रद्धालु भक्त घरों में रहकर ही मां गंगा की आराधना करें। कोविड नियमों का पालन करते हुए सरकार का सहयोग करें। इस अवसर पर समाजसेवी संजय जैन, नमित जैन, अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, आचार्य पवन दत्त मिश्र, लालबाबा, पंडित प्रमोद पाण्डे, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।

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