भारत जल्द ही खिलौना उद्योग में भी आत्मनिर्भर बनेगा : स्मृति ईरानी

मुरादाबाद। केंद्रीय टेक्सटाइल्स और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी बोलीं, भारत के इंजीनियरिंग ज्ञान का दुनिया लोहा मानती है। टॉयकैथॉन-21 के माध्यम से हम इंजीनियरिंग का उपयोग खिलौनों के निर्माण में करना चाहते हैं। बच्चों की प्राथमिक शिक्षा घर से होती है, इसीलिए बच्चों में जिज्ञासा जगाने, उनका मनोरंजन करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए खिलौने सबसे अच्छी चीज हैं। उम्मीद करती हूँ, इससे दुनिया में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। वह बोलीं, दुनिया का खिलौना उद्योग 1.5 अरब डॉलर का हैं। करीब 85% भारत में आयात किया जाता है, इसीलिए इस टॉयकैथॉन-21 प्रतियोगिता के जरिए हम खिलौना उद्योग में भी आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। बच्चों के संज्ञानात्मक एवं मनोप्रेरक विकास, स्मृति कौशल और उनकी एकाग्रता विकसित करने के प्रति हमें संजीदा रहना होगा।

टॉयकैथॉन के माध्यम से हम उनके इन स्किल्स को विकसित करना चाहते हैं। केंद्रीय टेक्सटाइल्स और महिला एवं बाल विकास मंत्री एआईसीटीई की ओर से आयोजित टॉयकैथॉन-21में बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअली बोल रही थीं। इस बड़े आयोजन में शिक्षा मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अमूल्य योगदान है। इस प्रतिस्पर्धा में नौ विषयों पर 24 राज्यों की कुल 286 टीमें में भाग ले रही हैं। एआईसीटीई ने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी समेत यूपी में आठ नोडल सेंटर बनाए हैं जबकि पूरे देश में 87 नोडल सेंटर इस प्रतिस्पर्धा के लिए सलेक्ट किए गए हैं। यह प्रतिस्पर्धा पूरे देश में आज से प्रारम्भ हो गई है, जो 24 जून तक चलेगी। इस प्रतिस्पर्धा का मकसद लीक से हटकर रचनात्मक, तार्किक सोच और पारंपरिक भारतीय खिलौनों को फिर से खोजना और पुनः डिजाइन करना है। इस प्रतिस्पर्धा में इन्नोवेटिव स्टुडेंट्स के लिए 50 लाख के इनाम जीतने का अनूठा अवसर है। मेजबान फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग- एफओई, टीएमयू नोडल सेंटर में यूपी के अलावा यूके और पुडुचेरी की 30 टीमें भाग ले रही हैं। इस ओपनिंग सेरेमनी में केंद्रीय मंत्री के अलावा एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, एनबीए, नई दिल्ली के चेयरमैन प्रो. केके अग्रवाल, टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह, एफओईसीएस निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी समेत एक दर्जन से अधिक विशेषज्ञों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। देशव्यापी टॉयकैथॉन-21 का ग्रैंड फिनाले 26 जून को होगा। उल्लेखनीय है, एआईसीटीई की योजना पहले भौतिक खिलौनों के लिए भौतिक टॉयकैथॉन और डिजिटल खिलौनों के लिए डिजिटल टॉयकैथॉन कराने की थी, लेकिन कोविड महामारी के चलते फिजिकल टॉयकैथॉन प्रतियोगिता को स्थगित कर दिया गया। ग्रैंड फिनाले के दौरान चयनित टीमें वस्तुतः अपने खिलौनों को जूरी पैनल के सामने पेश करेंगी, जिसमें प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-एनईपी -2020 में नवाचार और अनुभवात्मक शिक्षा पर बहुत जोर है। एनईपी से प्रेरणा लेते हुए एआईसीटीई शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि देश के युवा दिमागों को उनके विचारों को नया करने, अनुभव करने और उन्हें मूर्त रूप देने और मंच प्रदान करने के लिए विभिन्न हैकथॉन आयोजित किए जा सके। इसी तर्ज पर हमने अपने इनोवेटर्स को घरेलू खिलौना बाजार में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करने के लिए इस टॉयकैथॉन का आयोजन किया है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमें अपने इंजीनियरिंग संस्थानों से टॉयकैथॉन-21 में भारी भागीदारी मिली है। इस प्रतियोगिता का श्रेय केंद्रीय टेक्सटाइल्स और महिला एवं बाल विकास मंत्री माननीया श्रीमती स्मृति ईरानी जी को जाता है, क्योंकि टॉयकैथॉन का आइडिया उन्हीं का है।

एनबीए, नई दिल्ली के चेयरमैन प्रो. केके अग्रवाल बोले, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा होम एजुकेशन से शुरू हो जाती है, जिसमें हम बच्चों को कहानियां सुनाते हैं। चित्र दिखाकर उनकी पिक्टोरिअल थिंकिंग डवलप करवाते हैं। टॉयकैथॉन के जरिए टॉयज डवलप करने की बात की जा रही है, जिससे बच्चों की होम एजुकेशन और सुदृढ़ की जाएगी। उन्होंने अपने बचपन के खिलौनों के उदाहरण के साथ टॉयकैथॉन की प्रासंगिता पर प्रकाश डाला। बोले, चीन ने खिलौना बाजार में पूरी दुनिया में कब्ज़ा कर रखा है, लेकिन चीन के खिलौने पर्यावरण फ्रेंडली नहीं हैं। इसी से प्रेरणा लेते हुए हम अपने युवा प्रतिभाओं को पर्यावरण फ्रेंडली खिलौने विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। टॉयकैथॉन का प्रथम उद्देश्य बच्चों में खिलौनों के माध्यम से बुद्धिमत्ता विकसित करना है। प्रो. अग्रवाल बोले, केंद्र सरकार का लक्ष्य, बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मचिंतन के प्रहरी बन सकें। उम्मीद जताई टॉयकैथॉन इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेगा।

टीएमयू के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह बोले, खिलौनों के प्रोडक्ट के रूप में खिलौना बाजार आज पूरी दुनिया में 10 हजार करोड़ रुपए का है, लेकिन चीन के ज़्यादातर खिलौने हमारी संस्कृति, परम्परा और पर्यावरण के प्रति कतई अनुकूल नहीं हैं। न ही उन्हें रिसाइकिल किया जा सकता है, इसीलिए हम टॉयकैथॉन के जरिए अपने बच्चों को अपनी संस्कृति, परम्परा और पर्यावरण के अनुकूल खिलौनों का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। एआईसीटीई ने हमें देश के चुनिंदा 87 नोडल सेंटरों में हमें भी मेजबानी सौंपी, इसके लिए हम उनके दिल से आभारी हैं। उन्होंने भरोसा जताया, टीएमयू को भविष्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो हम उसका निर्वहन पूरे समर्पण भाव से करेंगे।

एफओईसीएस के निदेशक एवं टॉयकैथॉन-21 के सिंगल प्वाइंट और कांटेक्ट-एसपीओसी प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी बोले, टॉयकैथॉन-21 मंथन ऑफ़ इंडियन माइंड्स है। उन्होंने इस प्रतियोगिता को समुद्र मंथन की मानिंद बताते हुए बोले, जिस प्रकार दुनिया का प्रथम शोध कार्य था, जिससे हमें बहुमूल्य रत्न मिले। उसी प्रकार इस प्रतियोगिता से भी उन्होंने खिलौनों के रूप में अनगिनत रत्न मिलने की उम्मीद जताई। एफओई को टॉयकैथॉन-21 की मेजबानी मिलने से गदगद प्रो. द्विवेदी बोले, यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के ड्रीम प्रोजेक्ट में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी का इंजीनियरिंग संकाय मील का पत्थर साबित होगा। प्रो. द्विवेदी ने सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा, हम छात्रों के समग्र विकास और उन्हें वास्तविक उद्यमी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज कुमार गोस्वामी ने किया।

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