Tuesday, 1 June 2021

कुर्सी के लिए तीन देवियों में छिड़ा संग्राम, किसे मिलेगा लकी नं 51 का सम्मान?

गाजीपुर (DVNA)। जनपद मे जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दौड शुरू हो गयी है जिसमे भाजपा के टिकट पर सदस्य का चुनाव जीती डा बंदना यादव के साथ सपा की प्रत्यासी कुसुम लता व निर्दल प्रत्याशी सपना सिह के बीच कडे व त्रिकोणीय संघर्ष की बिसात दलीय दिग्गज और समर्थक बिछाने लगे है.

भासपा व बसपा है हलकान वजूद के लिए दिग्गज बना रहे प्लान

आजादी के बाद 50 जनप्रतिनिधियों व अफसरो ने जिले की प्रथम कुर्सी का स्वाद चखा है लेकिन इस बार 51 के लकी नं पर कौन बैठेगा इस बात को लेकर छिडे संग्राम पर जिले भर की निगाह टिकी है. कुछ प्रत्याशी दावत तो कुछ निजी मुलाकात से नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले मे लेने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे है. लेकिन ओबैसी की पार्टी से जीत कर आये दो सदस्यों के साथ बसपा के 8/9 सदस्यों को रिझाने और अपने पाले मे लेने की जोर आजमाइश जारी है.

20 साल मे पहली बार मनोज सिन्हा व मोख्तार के बिना ही छिडा महा संग्राम

दो दशक से जिले के हर चुनाव मे विकास पुरुष के नाम से विख्यात जम्बू के एलजी व बाहुबली विधायक मोख्तार की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है लेकिन इस साल दोनो महारथी जनपद मे मौजूद नही है. सारे गिले शिकवे भूल जंगीपुर विधायक विरेंद्र यादव सपाई दिग्गज ओमप्रकाश सिह व मौजूदा बसपा सासंद अफजाल अंसारी की अंदरखाने पक रही खिचडी से जिले की राजनीति मे पूर्व सांसद राधे मोहन सिह की नैया डूबने के कगार पर है. पत्नी के चुनाव हार जाने से उनके कद व काबलियत पर सवालिया निशान लग गये है.

68 सदस्यों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा सजगता से बना रहे प्लान

मौजूदा तीन प्रत्याशी व समर्थक लगातार एक एक वोट को अपने पाले मे करने के लिए सभी 68 निर्वाचित सदस्यों से लगातार संपर्क बना अपनी कोशिश को अमली जामा पहनाने का भगीरथ प्रयास कर रहे है. काग्रेस व भारतीय समाज पार्टी की हालत ऐसी नही है जिससे इस संग्राम मे दोनो दल मूकदर्शक की भूमिका मे है.

चुनाव हार चुके दिग्गज अपना वजूद बचाने के लिए परेशान

कुल मिलाकर दो दशक से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लेकर जिला पंचायत की कुर्सी का बंदन करने वाले विजेता सदस्य इस बार काफी उत्साह मे है अध्यक्ष कोई भी हो मां लक्ष्मी के आशीर्वाद लेने के लिए लगातार तीनो देवियों के फाउंडर्स से संपर्क बना कर अपने जीत के बाद होने वाले सम्मान को लेकर सजगता से आगे बढ़ रहे है. कुछ ऐसे भी है जो हारने के बाद भी इसी भीड का हिस्सा बनकर टाईम पास करने मे ही अपनी भलाई समझ चुके है.

बुलबुल पाण्डेय

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