प्रधानों और गावों की बल्ले-बल्ले, आचार संहिता से मुक्त हुए गांव

 

बांदा-डीवीएनए। गावों और प्रधानों के विकास की अब बल्ले-बल्ले शुरू हो जायेगीक्यों की अब आचार संहिता हटने से वह मुहूर्त आ गया। अब पंचायत चुनाव पूरे होने के साथ ही गांव आचार संहिता से मुक्त हो गए हैं। अब सरकार की योजनाएं गति पकड़ रही हैं। कोरोना काल में श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा न हो मनरेगा को एक बार फिर प्रवासियों का सारिथी बनाया गया है। सभी ब्लाकों के कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी प्रवासी श्रमिक आएं यदि उन्हें काम की जरूरत है तो जाब कार्ड बनाकर रोजगार दिया जाए।
मनरेगा केंद्र सरकार की रोजगार परक महत्वाकांक्षी योजना है। जिले में सलाना श्रम बजट करोड़ों का है। वर्तमान में दो लाख 87 हजार कुल जाब कार्डधारक हैं। कोरोना महामारी के बीच एक बार फिर यह योजना प्रवासियों को रोजगार मुहैया कराएगी। जिले स्तर पर विभाग ने प्लान तैयार कर लिया है। ब्लाकों के कार्यक्रम अधिकारियों को बिदुवार निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य प्रारंभ कराकर रोजगार दिलाया जाए। पंचायत चुनाव के आचार संहिता की अवधि समाप्त हो गयी है। अन्य जिलों की तरह बांदा में भी काफी संख्या में प्रवासी श्रमिक आए हैं। लिहाजा इन्हें रोजगार मुहैया कराने के लिए जाब कार्ड जारी कराया जाए। पीएमवाइजी, एमएमवाइजी की दूसरी किस्त के सापेक्ष ईएमआर (ई मस्टर रोल) जारी किए जाने को निर्देशित किया गया है। ताकि किसी भी जरूरतमंद प्रवासी को रोजगार के लिए परेशान न होना पड़े। उनसे गांव में ही काम मुहैया कराया जाए। मनरेगा के उपयुक्त राघवेंद्र तिवारी ने बताया कि मनरेगा योजना से प्रवासियों को गांव में ही रोजगार मिलेगा। ब्लाकों के कार्यक्रम अधिकारियों को सभी ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दे दिए गए हैं। काम की कमी नहीं होने पाएगी।
संवाद विनोद मिश्रा

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