सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका, वैक्सीन की खरीद और ऑक्सीजन प्लांट के लिए पीएम केयर फण्ड का हो इस्तेमाल

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से देश में त्राहि मची हुई है। नए मरीजों में संख्या में बहुत तेज वृद्धि के साथ संक्रमण की रफ्तार ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया है। देश में दवाई से लेकर ऑक्सीजन और अन्य मेडिकल उपकरणों की कमी पड़ गई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि ऑक्सीजन और इलाज की कमी से लोग लगातार मर रहे हैं। कोरोना से बिगड़ती इस स्थिति के बीच आवश्यक वस्तुओं को जुटाने के लिए खरीदारी पीएम केयर फंड से कराए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। ये याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विप्लव शर्मा ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि सभी राज्यों के विधायकों/सांसदों को यह भी निर्देश दिए जाएं कि वे इस आपदा के वक्त अपने विधानसभा/संसदीय क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता के साथ पीएम केयर फंड का इस्तेमाल करें।

विप्लव शर्मा ने याचिका में यह भी अपील की है कि सभी प्राइवेट और चैरिटेबल अस्पताल अपने मरीजों के लिए मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करें और उसे उपलब्ध कराएं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा सभी शहरों में बिजली आधारित शवदाहगृह बनाने और मौजूदा इलेक्ट्रिक सुविधा युक्त श्मशान घाटों की स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग है।

शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण अस्पताल और सुविधाओं के अभाव में कोविड मरीजों को भर्ती करने से मना कर रहे हैं, इसलिए कोर्ट सभी 738 जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएम केयर्स फंड के इस्तेमाल को अनुमति दें। याचिका में केंद्र सरकार द्वारा 24 अप्रैल को मेडिकल उपकरणों पर तीन महीने के लिए आयात शुल्क को हटाए जाने के नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिए पीएम केयर्स फंड को संविधान के अनुच्छेद-12 के तहत 'राज्यÓ घोषित करने की मांग की गई है। इसमें यह भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि पीएम केयर्स की वेबसाइट पर इसकी ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजानिक किया जाए। इसके अलावा दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर्स को सूचना के अधिकार के तहत 'पब्लिक अथॉरिटीÓ घोषित करने की मांग वाली एक दूसरी याचिका भी लंबित है।

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