Monday, 15 February 2021

भगवद् गीता और PM मोदी की तस्वीर लेकर अंतरिक्ष में जाएगा भारत का सैटेलाइट

नई दिल्ली।  फरवरी के आखिर में लॉन्च होने वाली सतीश धवन सैटेलाइट  में भगवद गीता की एक कॉपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर और 25,000 लोगों के नामों को अंतरिक्ष में ले जाया जाएगा। इस सैटेलाइट को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल सी-51 के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगी। इस नैनो सैटेलाइट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को आकार देने वाले महान व्यक्तित्व सतीश धवन के नाम पर पड़ा है। निजी क्षेत्र का यह पहला उपग्रह होगा, जो दूसरे अंतरिक्ष मिशन की तरह भगवद् गीता, प्रधानमंत्री मोदी की फोटो और अन्य 25,000 लोगों के नामों को लेकर अंतरिक्ष में जाने वाला है। इस नैनो सैटेलाइट को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा। 
इसरो के अपने पहले मिशन के तहत 28 फरवरी को ब्राजील के उपग्रह अमेजोनिया-1 और तीन भारतीय पेलोड को प्रक्षेपित करने की योजना बना रही है। इन पेलोड में से एक भारतीय स्टार्टअप द्वारा निर्मित है। इन उपग्रहों को चेन्नई से 100 किमी दूर श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से सुबह 10 बजकर 24 मिनट पर पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल सी-51 के माध्यम से प्रक्षेपित किया जाना है।
स्पेसकिड्ज इंडिया के संस्थापक और डॉ श्रीमथि केसन ने बताया कि इस समय ग्रुप में काफी एक्साइटमेंट है। यह अंतरिक्ष में जाने वाला उनका पहला उपग्रह होगा। जब हमने मिशन को अंतिम रूप दिया, तो हमने लोगों से उनके नाम भेजने को कहा जो अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। इसके बाद एक हफ्ते के अंदर हमें 25,000 आवेदन मिले। इनमें से 1,000 नाम भारत के बाहर के लोगों के थे।
सैटेलाइट में भगवत गीता और पीएम मोदी की तस्वीर भेजने का फैसले पर केसन ने बताया कि दूसरे स्पेस मिशन को देखते हुए उन्होंने ये फैसला लिया है जो की अपने साथ बाइबल लेकर जाते हैं। इसी के साथ उन्होंने ये भी बताया कि उनकी ये सैटेलाइट आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगी, क्योंकि ये पूरी तरीके से भारत द्वारा विकसीत की गई है। इसलिए इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। 
इस नैनोसेटेलाइट का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक पिताओं में से एक के नाम पर रखा गया है और द्वारा विकसित किया गया है। स्पेसकिड्ज छात्रों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक संगठन है। इस सैटेलाइट में तीन वैज्ञानिक पेलोड भी ले जए जाएंगे। इनमें से एक अंतरिक्ष विकिरण का अध्ययन करने के लिए, एक मैग्नेटोस्फीयर का अध्ययन करने के लिए और एक कम बिजली चौड़े क्षेत्र के संचार नेटवर्क का प्रदर्शन करेगा।
 
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