Friday, 19 February 2021

शबनम को जज ने 29 सेकेंड में सुनाई थी मौत की सजा, ये थी वजह

भूदेव भगलिया, अमरोहा। शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी। इस मामले में अमरोहा कोर्ट में करीब दो साल तीन महीने तक केस की सुनवाई चली। 29 गवाहों के बाद जज ने 29 सेकंड में फैसला सुना दिया था।

घटना यूपी के अमरोहा जनपद के हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में 14 अप्रैल 2008 को हुई थी। मास्टर शौकत की शिक्षामित्र बेटी शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम और फुफेरी बहन राबिया और भतीजे अर्श की हत्या कर दी थी। 

इस मामले में अमरोहा कोर्ट में दो साल तक सुनवाई चली थी। इस दौरान 100 तारीखों पर 29 गवाहों ने अपने सवालों को दर्ज कराया था। इसके बाद 10 जुलाई 2010 में जिला जज एमएए हुसैनी ने 29 सेकेंड में ही फैसला सुना दिया था। फैसले में जज ने लिखा कि शबनम और सलीम को तब तक फांसी पर लटकाया जाये तब तक उनका दम न निकल जाए। 

शबनम ने जिला कारागार में दिया था बेटे को जन्म
अपने परिजनों की हत्या करने के बाद मुरादाबाद जिला कारागार में बंद शबनम ने बेटे को जन्म दिया था। उसने अपने बेटे को कलेजे से लगााकर रखती थी। जानकारी के अनुसार शबनम अपने बेटे को महिला बंदियों के साथ पढ़ाती थी। 

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