मप्र: कमल नाथ का बयान निंदनीय, जनता से माफ़ी मांगे: अर्चना चिटनिस

मप्र: कमल नाथ का बयान निंदनीय, जनता से माफ़ी मांगे: अर्चना चिटनिस


मप्र: कमल नाथ का बयान निंदनीय, जनता से माफ़ी मांगे: अर्चना चिटनिस


बुरहानपुर, 26 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ ने विधानसभा की कार्रवाई को ‘‘बकवास‘‘ कहकर सिर्फ विधानसभा का ही अपमान नहीं किया है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ का यह बयान बेहद निंदनीय है एवं इस बयान पर उन्हें मध्यप्रदेश के साथ संपूर्ण देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

यह बात पूर्व मंत्री एवं भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता अर्चना चिटनिस ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा द्वारा लिखे गए पत्र पर विधानासभा अध्यक्ष ने तुरंत संज्ञान लिया है और कार्रवाई किए जाने की बात भी कही है। जिसके लिए मैं विधानसभा अध्यक्ष का लोकतंत्र के प्रति श्रद्धा रखने वाली जनता की ओर से कोटि-कोटि आभार व्यक्त करती हूं। प्रेसवार्ता को भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज लधवे ने भी संबोधित कर अपने विचार रखें।

कमल नाथ की अशोभनीय टिप्पणी

चिटनिस ने कहा कि कमल नाथ छिंदवाड़ा क्षेत्र से मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य भी है, उन्होंने 25 अप्रैल को एक समाचार के माध्यम को दिए गए एक साक्षात्कार में विधानसभा की कार्रवाई को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक, अशोभनीय और सदन की मर्यादा के विरूद्ध कदाचरण की श्रेणी में आने वाली टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मैं विधानसभा के अंदर इसलिए नहीं जाता है, क्योंकि विधानसभा में बकवास होता है और एक दल के लोग बकवास करते हैं, तो क्या मैं वहां ‘‘बकवास‘‘ सुनने जाऊंगा।

पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि विधानसभा, लोकसभा में जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए जाते हैं और जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठाते हैं। विधानसभा और लोकसभा से ही जनता से जुड़ी हुई योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाता है। यहीं से ही योजनाओं पर नीति निर्धारित की जाती हैं।

विधानसभा की अपनी एक व्यवस्था

उन्होंने कहा कि विधानसभा की अपनी एक व्यवस्था होती है। नियम-कानून होते हैं। मर्यादा होती है और विधानसभा की कार्रवाई नियम-कानून, मर्यादा के तहत ही होती है। ऐसे में विधानसभा की कार्यवाही को बकवास कहकर कमल नाथ ने संपूर्ण विधानसभा की व्यवस्था को ही तार-तार कर दिया है। कमल नाथ सीनियर नेता हैं, जिनको राजनीति का लंबा अनुभव है। उनके द्वारा इस तरह की बयानबाजी दूसरे नेताओं को भी अमर्यादित आचरण की प्रेरणा देगी, जो उचित नहीं है। सदन के अंदर प्रत्येक सदस्य को संविधान एवं विधानसभा की प्रक्रिया और आचरण का पालन करना अनिवार्य होता है। ऐसा नहीं करने पर किसी भी सदस्य को सदन का सदस्य होने का अधिकार नहीं है।

हिन्दुस्थान समाचार/निलेश जूनागढ़े

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