आठ स्थानों पर दर्शनों के लिए रखा जाएगा बैंसला का पार्थिव शरीर, साढ़े तीन बजे होगा अंतिम संस्कार

आठ स्थानों पर दर्शनों के लिए रखा जाएगा बैंसला का पार्थिव शरीर, साढ़े तीन बजे होगा अंतिम संस्कार


आठ स्थानों पर दर्शनों के लिए रखा जाएगा बैंसला का पार्थिव शरीर, साढ़े तीन बजे होगा अंतिम संस्कार


जयपुर, 1 अप्रैल (हि.स.)। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के प्रणेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पार्थिव देह आज पंचतत्व में विलीन होगी। दोपहर करीब साढ़े 3 बजे बैंसला का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मुंडिया में किया जाएगा। इससे पहले जयपुर से उनकी पार्थिव देह मुंडिया के लिए रवाना हुई। जयपुर से मुंडिया के बीच बैंसला की पार्थिव देह करीब आठ स्थानों पर अंतिम दर्शनों और श्रद्धांजलि के लिए रखी जाएगी।

जयपुर से मुंडिया के बीच कानोता, दौसा, भांडारेज, खेड़ली, दुब्बी कलाई, सिकंदरा, मानपुरा मोड़, बालाजी, पाटोली, पीपलखेड़ा, महुआ, गाजीपुर, खेडला, सलेमपुर थाना, देवलेन मोड, नयागांव, पाटकटरा, सैलपुरा होते हुए उनकी पार्थिव देह पैतृक निवास मुंडिया पहुंचेगी। यहां अंतिम संस्कार के धार्मिक रीति रिवाज करने के बाद करीब 3:30 बजे पार्थिव देह का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बैंसला के प्रति लोगों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह को करीब आठ स्थानों पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा।

गुर्जर समाज के प्रतिनिधि और राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने 81 साल की उम्र में गुरुवार 31 मार्च को अंतिम सांस ली। दो बार कोरोना की चपेट में आने के बाद लंबे समय से बीमार चल रहे कर्नल की गुरुवार सुबह अचानक तबीयत खराब हुई थी। इसके बाद उन्हें उनके बेटे विजय बैंसला सीकर रोड स्थित मणिपाल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सेना में 20 साल गुजारने के बाद बैंसला गांव लौटे तो उन्होंने 2007 में पहली बार गुर्जर समाज को आरक्षण दिलवाने के लिए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की। आंदोलन पीक पर पहुंचा तो सड़क से लेकर रेल की पटरियों तक पर उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। अपने जुझारू व्यक्तित्व के कारण वो गुर्जर समाज के आइकन बनकर उभरे।

हिन्दुस्थान समाचार/रोहित/ ईश्वर

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