मुसलमानों के साथ सौतेला व्यवहार न करे प्रदेश सरकार: डॉ. शाज़िया

अज़हर उमरी
कानपुर।
ईद मिलादुन्नबी की छुट्टी यू इस में लागू करवाने वाली  डॉ शाजिया तशनेम सिद्दीकी ने प्रदेश में मौजूदा सरकार के द्वारा ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकलने वाले जुलूस ए मुहम्मदी पर रोक लगाने पर अपना एतराज़ जताते हुए कहा कि कोविड -19 की महामारी प्रोटोकॉल के चलते जुलूस मोहम्मदी निकालने पर रोक लगा दी गई है। जबकि कुछ शहरों में इसकी इजाज़त नियमो के साथ दे दी गई है। 

यूएस से पीएचडी की मानद उपाधि प्राप्त डॉ शाजिया तशनेम सिद्दीकी का कहना है जब चुनावी रैलियां सम्मेलन एवं अन्य धर्मो के कार्यक्रम हो सकते हैं। तो  जुलूस भी प्रोटोकॉल के नियमो के साथ क्यों नहीं निकाला जा सकता मुसलमानों के लिए सैतेला व्यवहार क्यों है। 

इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने की बात कही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष अधिकार प्राप्त डॉ. सिद्दीकी  एक ताकतवर आवाज़ है। एशिया में अरब के महामहिम राजकुमार अल वालिद बिन तलाल की निजी सचिव होने के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के  फेडरेशन में भी नेतृत्व कर रहीं हैं। उसी के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के निजी सचिव मार्टिन सीजे मोंगील्लो, सीईओ यूनाइटेड स्टेट प्रेसिडेंशियल सर्विस सेंटर तक एक पोस्ट के ज़रिए अपनी बात रख दी। 

ऑफिसर द्वारा पूछे जाने पर शाज़िया ने पूरी बात बताते हुए कहा  ईद मिलादुन नबी मुसलमानों पैगम्बर मोहम्मद के जन्म दिवस है इसलिए ये त्योहार मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है। इसी मौके पर हर साल रात में सजावट और दूसरे दिन जुलूस निकाला जाता है। कानपुर का जुलूस ए मोहम्मदी एशिया का सबसे बड़ा जुलूस है जिससे मुसलमानों की मान्यताएं जुड़ी है। यह त्यौहार शांति के संदेश देता है। इसलिए ज़रूर मनाया जाना चाहिए जिसके बाद अपनी निजी संस्था हैलोवीन में ईद मिलादुन्नबी के दिन छुट्टी का ऐलान कर दिया और इसको मनाए जाने की बात कही एजेंसी द्वारा इस छुट्टी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू कराने का आश्वासन भी  दिया गया है । एजेंसी ने उनकी बात को गंभीरता से लेते हुए मान्यता दी । डॉ शाजिया इस बात से बेहद खुशी जताई है। और सरकार को भेदभाव ना करने की नसीहत भी दी है। 

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