सीएम योगी का फरमान- सरकारी कर्मचारियों को बताना होगा, शादी में लिया था दहेज?

लखनऊ। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में 2017 के पहले जिन लोगों का शासन था वो भी सबके विकास की बात करते थे पर विकास सिर्फ उनके परिवार का ही हुआ. सीएम योगी ने कहा कि उन्हें स्वयं और स्वयं के परिवार के अलावा समाज और राष्ट्र के बारे में कोई चिंता थी ही नहीं, यही कारण रहा कि प्रदेश पिछड़ता गया, बदहाली होती गई, बेरोजगारी बढ़ती गई, दंगों की आग में प्रदेश को झोंक दिया गया और अब जब प्रदेश विकास के रास्ते पर बढ़ रहा है तो उन्हें ये पसंद नहीं आ रहा है.

यूपी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नया नियम लागू किया है, नियमानुसार कर्मचारियों को एक घोषणा पत्र जमा करना होगा, घोषणा पत्र में कर्मचारियों को बताना होगा कि उन्होनें अपनी शादी के दौरान दहेज लिया था या नहीं, जिन सरकारी कर्मचारियों की शादी 31 अप्रैल 2004 के बाद हुई है उनके लिए यह घोषणा पत्र देना अनिवार्य है.

सरकार की तरफ से कहा गया है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी घोषणा पत्र जमा नहीं कराता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी, सरकारी विभागों को 18 अक्टूबर तक घोषणा पत्र संकलित करके अपलोड करना है.

योगी सरकार के दहेज प्रथा को रोकने के लिए जारी किए गए इस आदेश के बाद से विभागों में उथल-पुथल मच गई है, सरकार को जमा किए जाने वाले अधिकतर घोषणा पत्रों में सरकारी कर्मचारियों ने दहेज के लिए ना ही किया है.

महिला कल्याण उत्तर प्रदेश लखनऊ के निदेशक ने सभी विभागों के अध्यक्षों को निर्देश पत्र जारी करते हुए कहा कि यूपी सरकार की तरफ से सामाजिक बुराई दहेज प्रथा को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश दहेज प्रतिषेध नियमावली, 1999 बनाई गई है.

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