वादे पर विश्वास नहीं, निषाद आरक्षण का राजपत्र व शासनादेश चाहिए

लखनऊ। विकासशील इंसान पार्टी(वीआईपी) के प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि मिशन-2022 में भाजपा का साथ तभी दिया जाएगा,जब वह चुनाव से पूर्व निषाद जातियों को एससी आरक्षण का राजपत्र व शासनादेश जारी करा दे। अगर भाजपा ने वादा पूरा नहीं किया तो वीआईपी 2022 अपने दमखम पर या सामाजिक न्याय की विचारधारा वाली पार्टी से गठबंधन कर अपने सिम्बल पर चुनाव लड़ेगी।

प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने जागरण उजाला से “अभी नहीं तो कभी नहीं” कि बात करते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य व केंद्र दोनों जगह भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है,भाजपा की नीयत ठीक हो तो 2-4 दिन में 341 में संशोधन कर आरक्षण डें सकती है। निषाद-कश्यप-बिन्द परजूनिया समाज नहीं,169 सीटों पर 40 हजार से 1.20 लाख वोटबैंक है। निषाद कटपीस नहीं थानवाली जातीय समूह है। आज़मगढ़ की मेंहनगर विधानसभा को छोड़ हर क्षेत्र में 10,20 हजार वोट है। उत्तर प्रदेश की 71 विधानसभा क्षेत्रों में 70 हजार से अधिक निषाद वोटर हैं। राजभर 22,चौहान 16,कुशवाहा/मौर्य/शाक्य/सैनी 43,यादव 52,लोधी 63,मुस्लिम 90,जाट 28-30,गूजर 13-15 व कुर्मी 56 सीटों पर प्रभावशाली हैं।

प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने जागरण उजाला से कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने वायदे के अनुसार 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण एवं निषाद मछुआरों का परम्परागत अधिकार नहीं दिया तो 2022 में भाजपा को सबक सिखाया जायेगा। अब वादा नहीं,अनुसूचित जाति आरक्षण का राजपत्र व शासनादेश चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष लौटन राम निषाद ने कहा कि 5 अक्टूबर, 2012 को भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने फिशरमेन विजन डाक्यूमेन्ट्स जारी करते हुए वायदा किया था कि 2014 में भाजपा की सरकार बनने पर आरक्षण की विसंगती को दूर कर निषाद मछुआरा जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिया व नीली क्रान्ति के माध्यम से आर्थिक विकास किया जायेगा। परन्तु भाजपा ने अभी तक अपना वायदा पूरा नहीं किया। “जब बिल्ली का मुंह गर्म दूध से जल जाता है,तो वह छाछ व मट्ठा भी फूँककर पीती है।” “अभी नहीं तो कभी नहीं” की बात करते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार इस समय आरक्षण नहीं देती है,तो उसके वादे पर विश्वास नहीं। 2 या 10 मंत्री बनाने से निषाद भाजपा के जाल में नहीं फंसेंगे,इन्हें सिर्फ और सिर्फ आरक्षण का शासनादेश व अधिकार चाहिए।रुद्रपुर देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद को अपमानजनक राज्यमंत्री बनाया गया है,जो 12.91% निषादवंशियों का राजनीतिक अपमान है। निषाद ने बताया कि मझवार, तुरैहा, गोड़, बेलदार आदि राष्ट्रपति की प्रथम अधिसूचना जो 10 अगस्त, 1950 को जारी की गयी, उसमें अनुसूचित जाति में शामिल किया गया।

उन्होंने इन जातियों को परिभाषित कर मल्लाह, केवट, मांझी, बियार, धीमर, धीवर, तुरहा, गोड़िया, रायकवार, कहार, बाथम आदि को अनुसूचित जाति का आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि भाजपा ने वायदा खिलाफी किया तो विधान सभा चुनाव 2022 में निषाद समाज भाजपा को हराने का काम करेगा। जब से उ.प्र. में भाजपा की सरकार बनी है, निषाद समाज के परम्परागत पुश्तैनी पेशों को माफियाओं के हाथों नीलाम किया जा रहा है। मत्स्य पालन व बालू खनन के पेशों पर माफियाओं का एकछत्र राज कायम है।

प्रदेश अध्यक्ष चौ.लौटनराम निषाद ने जागरण उजाला से कहा कि उ.प्र., बिहार, मध्य प्रदेश, झारखण्ड की सरकारों ने मल्लाह, केवट, बिन्द, धीवर, धीमर, कहार, गोड़िया, तुरहा, बाथम, रायकवार, राजभर, कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा है। परन्तु केन्द्र सरकार ने गम्भीरता से नहीं लिया। आरक्षण नहीं तो मिशन 2022 में वीआईपी का भाजपा से गठबंधन नहीं।

उन्होंने सेन्सस 2021 में जातिवार जनगणना व अनुच्छेद-15(4), 16(4) के तहत ओ.बी.सी. को कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका, पदोन्नति व निजी क्षेत्र के उपक्रमों में समानुपातिक आरक्षण कोटा की मांग की। सेन्सस-2021 में जातिगत जनगणना की बात करते हुए कहा कि जब पेड़ों, जानवरों व हिजड़ों की जनगणना करायी जाती है तो पिछड़ों और अगड़ों की क्यों नहीं? कास्ट व क्लास सेन्सस हो जाएगा तो दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा।

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