श्रीराम कथा महोत्सव का कलश यात्रा के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

मुरादाबाद। हरे कृष्ण सेवा न्यास समिति के तत्वावधान में वृंदावन धाम श्री गोपाल गौशाला मोहम्मदपुर बस्तौर ऊंचाकानी रोड निकट आरटीओ आफिस में नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।

मिलक बस्तौर से कथा स्थल तक निकली कलश यात्रा में पितांबर वस्त्रधारी सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश और नारियल लेकर गाजे बाजे के साथ भगवान के भजनों का गुणगान करते हुए चल रही थी। इसके बाद मानस मर्मज्ञ संत प्रवर शिव कुमार शास्त्री भक्तों को श्री रामकथा का रसपान कराया। श्री रामकथा का शुभारंभ पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. शैफाली सिंह, नगर विधायक रितेश गुप्ता, बिलारी पालिका परिषद के चेयरमैन पति चौधरी ऋषिपाल सिंह, समिति के संरक्षक श्याम लाल खंडेलवाल आदि ने दीप प्रज्जवलित करके किया। पंडित गोपाल दत्त शर्मा ने कराया। मुख्य यजमान सुधा त्यागी, प्रशांत त्यागी, अमित त्यागी रहे।

शिव कुमार शास्त्री ने कहा कि शंकर भगवान और माता पार्वती ने श्री राम कथा का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन पुण्य का परिणाम है। पुण्य के परिणाम से मानव जीवन प्राप्त हुआ। जिसका जितना पुण्य है उसको प्रभु से उतनी ही कृपा की प्राप्ति हुई है। मनुष्य के जीवन में जितना पुण्य संग्रह होगा उतना उसका चरित्र बलवान होगा। उन्होंने कहा कि जब जब संसार में अत्याचार और सनातन धर्म पर प्रहार होता है तब तब भगवान किसी न किसी रूप में आकर धर्म को बचाते हैं। श्रीराम कथा सुनने से मन को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र देव शर्मा ने बताया कि श्रीराम कथा महोत्सव 25 सितंबर से 3 अक्टूबर तक वृंदावन धाम श्री गोपाल गौशाला में प्रतिदिन साढ़े 3:30 से शाम साढ़े 6:30 बजे तक आयोजित होगी और आरती के बाद भंडारे का आयोजन भी प्रतिदिन होगा।

इस मौके पर समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र देव शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश खंडेलवाल, कार्यकारी सचिव श्याम सुंदर गौड़, कोषाध्यक्ष मनुस्मृति शर्मा, मीरा गुप्ता अशोक अरोड़ा, राम रतन शर्मा, आरके गंगवार, मनोज गुप्ता, सुशील शर्मा, संजय अग्रवाल, शशि अरोड़ा, नरेश वत्सल, राधेश्याम शर्मा, महेश चंद शर्मा, निमित जायसवाल, प्रेमानंद तिवारी, चौधरी महेंद्र सिंह, उमेश त्रिवेदी पप्पन, डा. बृजपाल सिंह यादव सचिन अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

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