सिल्वेन्जा हॉस्पिटल पर साढ़े चार लाख रुपये का जुर्माना

मुरादाबाद। महिला मरीज अक्सर चक्कर आने पर गिर जाती थी। उसने संभल के सिल्वेन्जा हॉस्पिटल में खुद को दिखाया तो डॉक्टर ने गंभीर बीमारी का संकेत बताते हुए ऑपरेशन न कराने पर कैंसर होने की आशंका जताई तो महिला मरीज ने हॉस्पिटल में सर्जरी कराई लेकिन ऑपरेशन के बाद महिला मरीज को बार बार लघुशंका की नई समस्या उत्पन्न हो गई क्योंकि लापरवाही बरतते हुए डॉक्टर ने मरीज को गलत टांके लगा दिए और नसों को भी उल्टा जोड़ दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, संभल ने इसे गंभीर लापरवाही माना और सिल्वेन्जा हॉस्पिटल पर साढ़े चार लाख का जुर्माना किया है जो नौ प्रतिशत ब्याज समेत अदा करना होगा।

यह मामला संभल जिले का है। यहां की संभल सदर तहसील क्षेत्र के गांव रूदायन निवासी विशन सिंह की पत्नी प्रेमवती (४०) अक्सर चक्कर आने पर गिर जाती थी। उन्होंने संभल के सिल्वेन्जा हॉस्पिटल में डॉ. हुरमा को दिखाया तो डॉ. हुरमा ने कुछ टेस्ट और अल्टॉसाउंड करवाया। रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि बच्चेदानी में संक्रमण और गांठें हैं। अगर शीघ्र्र गांठों को नहीं निकलवाया तो कैंसर हो सकता है। इस पर प्रेमवती सिल्वेन्जा हॉस्पिटल में भर्ती हुई तो डॉक्टर ने प्रेमवती की तीस अप्रैल 20१९ को सर्जरी की। लेकिन, सर्जरी के बाद प्रेमवती को लघुशंका (पेशाब) बार बार और बूंद बूंद करके आने की समस्या हो गई। इसके कारण प्रेमवती रात में सो भी नहीं पाती थी। इस पर प्रेमवती परिजनों के संग में हॉस्पिटल के चेयरमैन इसरार हुसैन व डॉ. हुरमा से मिली और बताया कि सर्जरी के बाद समस्या का समाधान होने के बजाए और बढ़ गया मगर दोनों ने मरीज प्रेमवती और उसके परिजनों की बात नहीं सुनी और अभद्रता करते हुए धक्के देकर हॉस्टिपल से निकल दिया।

इसके बाद प्रेमवती ने संभल में ही संजीवनी हॉस्पिटल में डॉ. राजेश अग्रवाल को दिखाया। साथ ही डॉ. अनिल श्रोत्रिय से सलाह ली तो दोनों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद गलत टांके लगाए गए और नसों को भी उल्टा जोड़ दिया गया है। सही करने के लिए तीन महीने बाद दोबारा ऑपरेशन कराना होगा और लगभग एक लाख रुपये खर्च होंगे। इस पर प्रेमवती के पति ने कई बार सिल्वेन्जा हॉस्पिटल के चेयरमैन से अनुरोध किया कि दोबारा ऑपरेशन कराने के लिए अब उनके पास रुपये नहीं हैं। इसलिए गलत ऑपरेशन के दौरान खर्च किए गए दो लाख रुपये 12 सितंबर 2019 को देने से इंकार कर दिए।

इस पर प्रेमवती ने अधिवक्ता देवेंद्र वाष्र्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, संभल में वाद दायर किया तो आयोग के अध्यक्ष राम अचल यादव व सदस्य आशुतोष ने दोनों पक्षों को गंभीरता से सुना। इसमें हॉस्पिटल के चेयरमैन ने बताया कि डॉ. हुरमा ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इंकार किया और कहा कि मरीज प्रेमवती पूरी तरह सही होने के बाद अस्पताल से गई लेकिन आयोग ने हॉस्पिटल के तर्कों को नहीं माना और प्रेमवती के अधिवक्ता द्वारा दिए गए साक्ष्य और कानूनी तर्कों को उचित ठहराते हुए कहा कि वैसाइका (ब्लेडर) वैजाइना को जोडऩे वाली नली उल्ट गई जिससे बूंद-बूंद पानी पेशाब की समस्या उत्पन्न हो गई जो गंभीर त्रुटि व इलाज में लापरवाही की श्रेणी में आता है। इसके लिए चेयरमैन और डॉ. हुरमा दोषी हैं। आयोग ने मरीज प्रेमवती को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति और दो लाख पचास हजार रुपये शारीरिक व मानसिक कष्ट के तौर पर देने के आदेश दिए। यह रकम नौ प्रतिशत ब्याज के साथ हॉस्टिपल को अदा करनी होगी। इतना ही नहीं, बीस हजार रुपये वाद खर्च के भी हॉस्टिपल को देनेे के आदेश दिए हैं।

चिकित्सक द्वारा लापरवाही का यह अजीबो गरीब प्रकरण था क्योंकि अस्पताल सही इलाज करने का दावा कर रहा था जबकि मरीज प्रेमवती को एक नई बीमारी बार बार पेशाब आने की हो गई और दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों ने इसका कारण ऑपरेशन के बाद गलत टांके लगाने और नसों को भी उल्टा जोड़ा बताया। ऐसे में आयोग ने हमार कानूनी साक्ष्यों को आधार माना और अस्पताल पर साढ़े चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश डॉक्टरों के लिए भी एक सबक होगा कि इलाज में लापरवाही बरतने पर भी दंड मिलता है। इसलिए चिकित्सा में कोताही न करें और मरीज का भरोषा न तोड़े।
देवेंद्र वाष्र्णेय, मुरादाबाद मंडल के उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता।

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