कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने जमीन खरीद मामले में भाजपा को घेरा

लखनऊ। केन्द्रीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सी.डब्ल्यू.सी.) के सदस्य तथा आउट रीच एण्ड को-ऑर्डिनेशन कमेटी, उत्तर प्रदेश के प्रभारी प्रमोद तिवारी ने कहा है कि जो घोटाला सामने आया उसके बाद राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष महत नृत्य गोपाल दास की ओर से ट्रस्ट के अंदर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर मनमानेपन, अपारदर्शिता का आरोप लगाया गया है। उनकी ओर से बताया गया कि पिछले एक साल से उन्हें ट्रस्ट के फैसलों के बारे में कुछ बताया नहीं जाता, सहमति नहीं ली जाती। महंत नृत्य गोपाल दास ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और जब अध्यक्ष ही मनमानेपन और अपारदर्शिता का आरोप लगा रहे हैं तो आप कल्पना कर सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में श्री तिवारी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अनुबंधित जमीन को लेकर उठे विवाद में सबसे पहले श्री राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास शास्त्री और हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास ने इसका मुखर विरोध किया। यही नहीं स्वामी स्वरूपानन्द ने भी सवाल उठाये है।
तिवारी ने बताया कि नगीना-बिजनौर की निवासी अलका लहोटी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद से जुड़े चर्चित व्यक्ति के खिलाफ गौशाला को लेकर सवाल उठाया है, उन्होंने कहा है कि इस गौशाला की 20 हजार मीटर जमीन पर अवैध कब्जा करके एक डिग्री कालेज की स्थापना कर दी और लोगों को भ्रमित करने के उद्देश्य से उसका नाम श्रीकृष्ण डिग्री कालेज रख दिया गया।
तिवारी ने बताया कि जमीन की कोई भी डील होती है तो स्टाम्प पेपर खरीदा जाता है। स्टाम्प पेपर जमीन की कीमत के आधार पर खरीदा जाता है।
तिवारी ने बताया कि रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी ने यह जमीन 18 मार्च 2021 को सायं 7.10 बजे पर खरीदी। इसका स्टाम्प पेपर शाम 5.22 बजे खरीदा गया। मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने ये जमीन सायं 7.15 बजे खरीदी और स्टाम्प पेपर शाम 5.11 बजे खरीदा।
तिवारी ने बताया कि ट्रस्ट को शाम 5.11 बजे कैसे पता चल गया था कि उन्हें कितने का स्टाम्प पेपर खरीद कर रख लेना है? यह क्या खेल था? स्पष्ट है कि ये सब आपस में मिलकर भगवान राम के मंदिर के लिए आए पैसे की बंदरबाँट कर रहे हैं।
तिवारी ने बताया कि अब कहा जा रहा है कि उन्हें यह जमीन 2 करोड़ में इसलिए मिली कि यह 2019 का एक पुराना एग्रीमेन्ट था। मतलब जमीन बेचने वाले ने कई साल बिना एक रुपया लिए इनको पुराने रेट पर जमीन बेचने का वादा कर रखा था। जरा हमें भी दिखाओ ऐसा भूमि मालिक! दूसरी बात इस एग्रीमेन्ट की चर्चा न रविमोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के रजिस्टर्ड खरीद पत्र में है न मंदिर निर्माण ट्रस्ट के रजिस्टर्ड खरीद पत्र में है। इसका यही अर्थ है कि ऐसा कोई एग्रीमेन्ट कभी था ही नहीं।
तिवारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कानून के मुताबिक जिस खरीद का इकरारनामा तहसील में रजिस्टर्ड नहीं है और उस पर स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान नहीं हुआ है वह मात्र कागज का एक टुकड़ा है। इस कागज के टुकड़े की कोई वैल्यू नहीं है। ये सारी खरीद फरोख्त तहसील पर हुई ही नहीं। दोनों खरीद फरोख़त अयोध्या के मेयर भाजपा नेता ऋषिकेश उपाध्याय के घर पर हुई। वहीं पर ट्रस्टी अनिल मिश्रा गवाह बनकर मौजूद थे। श्री राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को एक मेयर के घर जाकर जमीन क्यों खरीदनी पड़ी?
तिवारी ने बताया कि रविमोहन तिवारी जिनसे मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने जमीन खरीदी वह अयोध्या के मेयर भाजपा नेता ऋषिकेश उपाध्याय के समधी का साला है। दोनों रिश्तेदार हैं। दोनों का घर आसपास है। सब जानते हैं अयोध्या के बड़े भू माफिया कौन हैं? इनका कारोबार जमीन खरीद फरोख्त का है।
श्री तिवारी ने कहा है कि उस दिन का सरकारी दस्तावेज साबित कर रहे है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उसी दिन 18 मार्च, 2021 को दो अलग-अलग लोगों से दो ‘‘प्राइम लैण्ड’’ खरीदी। चैंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों जमीने हरीश पाठक एवं कुसुम पाठ की हैं, जो नवम्बर 2017 में उनसे रजिस्टर्ड हुई है। जिसमें एक का क्षेत्रफल 1.208 हेक्टेयर और दूसरे का क्षेत्रफल 1.037 हेक्टेयर था और ये अलग अलग कीमत क्रमशः रु. 18.5 करोड़ तथा रु. 8.00 करोड़ में खरीदी गयीं। यह बात प्रकाश में आ गयी है कि 1.037 हेक्टेयर भूमि हरीश पाठक एवं कुसुम पाठक से सीधे खरीदी गयी और पहले में बिचैलिया श्री रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी को रखा गया ।
श्री तिवारी ने कहा है कि जिस एग्रीमेण्ट/अनुबंध का सहारा लेकर इस 2 करोड़ रुपये की भूमि को 5 मिनट में 18 करोड़ रुपये में परिवर्तित कर दिया गया वह एग्रीमेण्ट टू सेल थी- बैनामा नहीं था। उस तारीख को यह एग्रीमेण्टध्अनुबंध अस्तित्व में ही नहीं था, तो इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि जब वह एग्रीमेण्ट/अनुबंध अस्तित्वहीन था तो उस अनुबंध का कानून की नजर में कोई अस्तित्व ही नहीं है। यही नहीं 2 करोड़ रुपये से 18 करोड़ रुपये में परिवर्तित की गयी वह रजिस्ट्री नहीं बल्कि एग्रीमेण्ट टू सेल है। चूँकि यह जमीन विवादित थी और मुकदमा चल रहा था तो यह देखना चाहिए था कि क्या यह संबंधित की जमीन है भी या नहीं? उन्हें इसका स्वामित्व कहाँ से आया? यह सवालों के घेरे में है ।
क्योंकि मार्च 2018 में जो एग्रीमेण्ट/अनुबंध पत्र बना था वह सितम्बर, 2019 में निरस्त हो गया था, और यह सरकार के एक अधिकृत अधिकारी ने दावा किया है कि वर्ष 2019 में वह अनुबंध पत्र निरस्त हो चुका था।
श्री तिवारी ने कहा है कि जो लोग श्री राम जन्मभूमि संघर्ष से जीवन पर्यन्त जुड़े रहे, और संघर्ष किया यदि वे इस पर सवालिया निशान लगा रहे है तो मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव, उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गाँधी की उस मांग का पूरी तरह समर्थन करता हूँ, जिसमें उन्होंने कहा है कि इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा करायी जाय।
उन्होंने कहा कि मैं, प्रियंका गाँधी की मांग पर जोर देते हुये बल देता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय की जिस बेंच ने इसका फैसला दिया है उस बेंच के जो बचे हुये शेष न्यायाधीश हैं उनकी ही निगरानी में इसकी जाँच करायी जाय क्योंकि उन्हें इसके तथ्य बेहतर मालूम है, और उन्होंने जीवित मूर्ति मानकर अपना फैसला आधारित किया था।
प्रेसवार्ता में उ0प्र0 कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं विधायक सोहिल अंसारी अशोक सिंह मौजूद थे।

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