नहीं चेते तो 2050 तक 50 फीसदी आबादी मायोपिया की चपेट में होगी

मुरादाबाद। संसार के 50 प्रतिशत लोग 2050 तक मायोपिया से पीड़ित होंगे। मायोपिया की प्रगति किन-किन कारणों से होती है ? जो बच्चे ज्यादातर मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और बाहरी खेलकूद में कम रूचि रखते हैं, ऐसे बच्चों में निकट दृष्टि दोष की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं।

बच्चों की आँखों के विकास के लिए उन्हें बाहरी खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जिन बच्चों के माता-पिता को निकट दृष्टि दोष होता है, उनके बच्चों को निकट दृष्टि दोष होने की अधिक संभावनाएं होती हैं। निकट दृष्टि दोष में चश्मे का नंबर न तो अधिक और न तो कम देना चाहिए।

यह कहना है अर्का जैन विश्वविद्यालय, जमशेदपुर, झारखण्ड के श्री सर्वजीत गोस्वामी का। वह तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ पैरामेडिकल साइंसेज के ऑप्टोमेट्री विभाग की ओर से निकट दृष्टि दोष और उससे होने वाली हानियों पर आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे।उन्होंने निकट दृष्टि दोष के प्रभाव को कम करने के सुझाव देते हुए बताया, निकट दृष्टि दोष के लिए आर्थोकेरेटोलॉजी लेंस और एट्रोपिन आईड्रॉप का इस्तेमाल करना चाहिए। जीवनशैली में सुधार के लिए उन कार्यों को कम करना चाहिए, जिसमें वस्तुओं को आँख के पास रखने की आवश्यकता हो। इस मौके पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार, ऑप्टोमेट्री विभाग के विभागाध्यक्ष श्री राकेश कुमार, डॉ. रुचि कांत, श्रीमती कंचन गुप्ता के अलावा बीऑप्ट और एमऑप्ट के करीब 150 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संचालन शिखा शर्मा ने किया।

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