Thursday, 6 May 2021

कृषि क्षेत्र को और सुचारू करने केंद्र सरकार ने उठाए ठोस कदम

नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र को और सुचारू करने के लिए केंद्र सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए विभिन्न नियम-कायदों के अनुपालन का बोझ कम कर दिया है। साथ ही प्रणाली सरल करते हुए बदलाव किए गए हैं। इससे देशभर के किसानों सहित कृषि क्षेत्र से सम्बद्ध लोगों को सुविधा होगी। इस संबंध में लिए गए निर्णयों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को समीक्षा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में सुधार पर लगातार जोर दिया है। इस दिशा में भारत सरकार ने एक के बाद एक अनेक कदम उठाए है। इसी तारतम्य में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के दिशा-निर्देशानुसार, मंत्रालय के अंतर्गत प्रभावी कार्यवाही की गई है। कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा भी मंत्री तोमर के अनुमोदन से किसानों की सुविधा के लिए कामकाज की प्रणाली सरल करते हुए अनेक बदलाव किए गए है।
न्यूनतम विनियामक अनुपालन पर आज केंद्रीय मंत्री तोमर द्वारा ली गई समीक्षा बैठक में बताया गया कि एगमार्क का डिजिटलीकरण एवं सरलीकरण किया जा रहा है, अब एगमार्क के तहत प्राधिकार प्रमाण-पत्र (सीए) के नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल कर 5 वर्षों की वैधता के साथ सीए जारी किए जाएंगे। इसके लिए अधिकृत पैकर भौतिक रूप से दौरा करने की, न्यूनतम मात्रा में ग्रेडिंग करने की एवं औपचारिक आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल उसे ऑनलाइन मोड के माध्यम से निर्धारित नवीनीकरण शुल्क का भुगतान कर संबंधित कार्यालय को सूचित करना होगा। एगमार्क के तहत कृषि जिंसों के श्रेणीकरण एवं चिह्नांकन हेतु वाणिज्यिक/ संघ/ सहकारी प्रयोगशालाओं का अनुमोदन/ नवीनीकरण भी सरल किया गया है। प्राधिकार प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण के लिए भौतिक निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। एगमार्क प्रतिकृति क्रम संख्याओं के निर्गमन हेतु आवेदन अधिकृत पैकरों द्वारा ऑनलाइन/ ई-मेल द्वारा जमा तथा निर्गत किया जाएगा। निर्यात हेतु एगमार्क के तहत श्रेणीकरण तथा चिह्नांकन के संबंध में प्रयोगशालाओं के अनुमोदन के लिए संयुक्त आकलन टीम (जेएटी) द्वारा प्रयोगशाला का आकलन/निरीक्षण आवश्यक नहीं होगा, यदि संबंधित प्रयोगशाला एनएबीएल प्रत्यायित/आईएसओ प्रमाणित है।
ईज ऑफ़ डूइंग इन एग्री बिजऩेस की दिशा में, कृषि मंत्रालय के पौध संरक्षण विभाग ने उद्योग/ व्यवसाय पर नियामक अनुपालन बोझ को कम करने के उद्देश्य से कीटनाशकों से संबंधित कई पहल की हैं। ऐसा किसानों से, 'व्यापार करने में आसानी' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया है। कीटनाशक अधिनियम-1968 और नियमों के तहत 31 मार्च 2021 तक कमी के लिए विनियामक प्रक्रियाओं की 15 आयटम की पहचान की गई थी, जिनमें से 11 अनुपालन, जो कीटनाशकों के पंजीकरण के लिए मौजूदा दिशा-निर्देशों से संबंधित हैं, रिकॉर्ड प्रस्तुत करना आदि को युक्तिसंगत बना दिया गया है या हटा दिया गया है। यह कदम कीटनाशकों के लिए पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने में तेजी लाएगा।
किसानों पर नियामक अनुपालन बोझ को कम करने के लिए आईसीएआर ने ऐसी 19 प्रक्रियाओं की पहचान की है, जो मुख्य रूप से बीज/ रोपण सामग्री/ लाइव स्टॉक/ टीके/ तकनीकी आदि की बिक्री व परीक्षण से संबंधित हैं। इन प्रक्रियाओं को सुगम किया गया है, जिससे किसानों का बोझ कम होगा व उन्हें सुविधा रहेगी। इन प्रक्रियाओं को आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों द्वारा संचालित किया जाता है। इसके साथ ही मंत्री जी द्वारा अब तक की लंबित शिकायतों की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में निपटान दर 98 प्रतिशत है। तोमर ने निर्देश दिया कि जनशिकायतों का निराकरण कम से कम समय में किया जाएं।
मंत्री तोमर ने वर्ष 2020 में शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान के घटकों की भी समीक्षा की। इस दौरान बताया गया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के पैकेजों का उद्देश्य कृषि में प्रशासनिक सुधारों के साथ ही बुनियादी ढांचे, क्षमता निर्माण आदि को मजबूत करना है।

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