Wednesday, 5 May 2021

कोर्ट ने कहा- इंजेक्शन का अभाव पैदा करना मौत बांटने के समान कृत्य

इंदौर। रेमडेसीविर इंजेक्शन के अभाव में कोरोना पीडि़त मरीजों की मृत्यु हो जाना ऐसे मरीजों को अप्रत्यक्ष रूप से मौत बांटने के समान है। रेमडेसीविर इंजेक्शन ब्लैक की कालाबाजारी करने वाले निजी अस्पताल के स्वीपर की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। उल्लेखनीय है कि लसूडिय़ा पुलिस ने देवास नाका क्षेत्र के सनराइज अस्पताल के शिव पर मानसिंह मीणा को 24 अप्रैल को रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए गिरफ्तार किया था।

मीणा ने जमानत आवेदन कोर्ट में पेा किया था जिसे अपर सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। मूल रूप से राजगढ़ जिले के रहने वाले मानसिंह मीणा की क्राइम ब्रांच और लसूडिय़ा पुलिस ने इंजेक्शन की सौदेबाजी करते हुए पकड़ा था। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि फोन पर बात करने के बाद इंजेक्शन का सौदा करने आए मीणा को पुलिस के जवानों ने एक इंजेक्शन के साथ पकड़ा था। यहां 30 हजार रुपये में इंजेक्शन बेच रहा था। इसके दो साथी एव मामले में अभी तो अंकित पटवारी और बजरंग को भी अलग-अलग पुलिस ने एक इंजेक्शन के सज्ञथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जमानत अर्जी पेश करते हुए अरोपियों के वकील के जरिए कोर्ट में कहा कि पुलिस ने उसे झूठा फंसाया है असल में अस्पताल द्वारा 30 हजार रुपये में इंजेक्शन बेचे जा रहे थे। अस्पताल की स्थिति को वहां उजागर कर रहा था लेकिन पुलिस ने अस्पताल वालों को बचाने के लिए उसे ही आरोपी बना दिया इंजेक्शन उपलब्ध करवानेवाले असल लोगों को पुलिस सामने नहीं ला रही है मीणा ने कोर्ट में यह भी कहा कि इस मामले में उसे योजनाबद्ध तरीके से फंसाया गया है।  

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