Wednesday, 5 May 2021

गांव में बढ़ते संक्रमण ने उड़ाई सरकार की नींद

इंदौर। इंदौर के लिए बुरी खबर है कि शहर के साथ ही अब कोरोना वायरस ने ग्रामीण क्षेत्रों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इंदौर की 78 फीसदी पंचायतें ऐसी हैं, जहां कोरोन केसेस की पुष्टि हो चुकी है। मेडिकल फेसिलिटी कमी अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। जिसका असर इंदौर के अस्पतालों में बेड की मारामारी के रूप में दिखने लगा है। अब तक शहर की बीमारी कहे जाने वाले कोरोना ने अब ग्रामीण क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर जिले में 312 ग्राम पंचायतें हैं और इसमें से 243 ग्राम पंचायतों में कोरोना संक्रमित मरीज हैं।

गत दिवस तक इन पंचायतों में 3354 लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 47 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना का सबसे ज्यादा कोहराम महू में दिख रहा है जहां एक्टिव केसेस की संख्या 1611 तब पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे समय गांव या पंचायत स्तर पर ही कोरोना की जांच के लिए टीम भेजी जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में यह सुझाव आया था कि गांवों में मोबाइल लैब चलाकर लोगों की जांच की जाए, ताकि गांव में ही सेंपलिंग और जांच की सुविधा मिल सके। फिलहाल इस पर भी अमल होता नहीं दिख रहा है। कलेक्टर ने बीते दिनों कहा था कि पंचायतवार कोविड केअर सेंटर बनेंगे। काम शुरू हुआ है जिसकी गति बढ़ाना जरूरी है। गांव में जागरुकता की कमी से ग्रामीण भी जांच से परहेज कर रहे हैं। यहां तक कि भ्रम और शंका-कुशंका के चलते वैक्सीनेशन भी नहीं करा रहे हैं।

परिवार में चार से अधिक लोग रहते हैं। सर्दी-बुखार-खांसी को सामान्य समझते हैं। कहीं काड़े, हल्दी-दूध, गुढ़-हल्दी से ट्रीटमेंट करते हैं। समस्य हल नहीं होती, तब जाकर गांव में ही क्लीनिक खोलकर बैठे डॉक्टर को दिखाते हैं। जांच पांच-सात दिन की दवा यह कहकर दे देता है कि दवा पूरी होने के बाद ठीक नहीं हुए तब जांच कराना है। दवा पूरी होने के बाद भी जब तबीयत ठीक नहीं होती, तब तक जांच कराई जाती है। तब अस्पताल लाया जाता है, यहां बेड नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में गांव के पेशेंट को बचाना मुश्किल हो रहा है।  

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