Friday, 28 May 2021

भारत में भी अब खेती के कार्य को आधुनिक दिशा की और ले जाने की जरुरत : केबी अग्रवाल

बरेली। भारत में भी अब खेती के कार्य को आधुनिक दिशा की और ले जाने की जरुरत है तभी और किसानों को भी इसका आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी। 

यह कहना है चैम्बर ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्री के वरिष्ठ पदाधिकारी एवम बरेली में आई टी आर फैक्टरी के पूर्व महाप्रबंधक रहे के बी अग्रवाल का। एक भेंट में श्री अग्रवाल ने पत्रकार निर्भय सक्सेना से कहा कि केंद्र सरकार अब जब इस दिशा में कृषि बिल के जरिए जब किसानों के लिए उन्नत खेती के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने को प्रयास में लगी है तो कुछ राजनीतिक स्वार्थी कथित नेता किसानो को ग़ुमराह कर उनका अहित ही कर रहे हैं जबकि सरकार के कई मंत्री वास्तविक किसानों को ग़ुमराह नही होने के लिए कई दौर की वार्ता तक कर चुके हैं।

उनकी हर शंका का जबाब भी मंत्रीगण खुल कर दे रहे हैं। श्री अग्रवाल का कहना है मैं जब वर्ष 1980 में अमेरिका एवं यूरोप गया था। उस समय उन देशों की जो उन्नत तथा माॅडर्न खेती थी वो अभी भी हमारे देश में नही है। सरकार द्वारा अब नये कृषि कानून एवं कान्ट्रेक्ट फार्मिंग से विदेशी टैक्नोलाॅजी भारत में आयेगी तथा किसानों की खेती वाली जमीन फसल, बीज आदि उन्नत तथा माॅडर्न होगें और किसानों की पैदावार बढने से उनकी आय भी बढ़ेगी । फूड इन्ड्रस्टी, डेरी, फिशरीज, पोल्ट्री, हाॅर्टीकल्चर इंडस्ट्री भी विकसित होगीं तथा आधुनिक हो जायेगी। रोजगार के साधन भी बढ़ेगे। देश मे इन नए कृषि कानून से वास्तविक किसानों को फायदा ही फायदा होगा। श्री अग्रवाल ने बताया कि इस समय भी कान्ट्रेक्ट फार्मिंग से पंजाब, हिमांचल, उत्तराखण्ड, बंगलोर, हैदराबाद आदि में किसानों की आय काफी बढ़ी है। भारत की कुल आबादी 133 करोड में लगभग 60 प्रतिशत अर्थात लगभग 78 करोड आबादी किसानो की है जो गाॅंवो में रहते हैं।
श्री अग्रवाल नेे कहा कि खेद का विषय है कि इस समय देश मे जो भी किसान नेता बनकर आगे आये हैं वे किसान हैं ही नहीं हैं। वह सब शहरों के बंगलों में रहते हैं, करोडों के मालिक है। उनके बच्चे भी देश के नामी इंग्लिश स्कूलों में अथवा विदेशों में पढ़ रहे हैं। वह सब कथित किसान महंगी कारों में होटल में घूम रहे हैं। इनमें से किसी ने भी स्वंय ट्रेक्टर चला कर खेती नहीं की है। इनके नाम भी बहुत कम जमीन है अथवा है ही नहीं। उनका आरोप है कि एसे लगभग सभी राजनीतिज्ञ किसान हैं तथा विपक्षी पार्टी कांग्रेस, कम्यूनिस्ट, आप पार्टी, अकाली दल, रालोद आदि के सदस्य रहे हैं तथा पूर्व में चुनाव भी लड़कर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये थे । यह गरीब किसानों को बहकाकर अपनी नेतागिरी चमकाना चाह रहे हैं। वर्तमान कोरोनाकाल मे 6 माह से किसान को गमरः कर अब काला दिवस मना रहे हैं। इन्हें गरीब किसानों की भलाई से कोई मतलब नहीं है। यह कथित किसान लोग केवल झूठ ही फैला रहे है कि इस कृषि कानून से किसानों की जमीन छिन जायेगी, इस कानून से किसानों की फसल बहुत सस्ते में बड़े व्यापारियों को बेचनी पडेगी और देश मे कृषि मंडियाॅं खत्म हो जायेगीं। यह नेता अपने इस झूठ से उन भोले भाले किसानों को बरगला रहे हैं।
कहा जाता है कि इन नेताओं कि आर्थिक मदद देश विरोधी दल या ताकतें कर रही है जो अब साफ होता जा रहा है । कथित बिचोलिये जो किसानो का कुछ एडवांस देकर उनकी फसल सस्ते में खरीदकर अपनी जेब भर रहे हैं। इनका सिर्फ एक ही मकसद है – केंद्र की सरकार को अस्थिर कर झुकाना । स्मरण रहे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के कल्याण में लगी है हजारों करोड़ रुपए वास्तविक किसानों के बैंक खाते में सरकार अब तक डाल भी चुकी है । सरकार गाॅंवो में सड़क बनाने, बिजली पहॅुचाने, शौचालय बनाने, तालाब खुदवाने, पुल बनाने, घरेलू गैस पहुॅंचाने, सस्ती स्वास्थ सेवा, कृषि बीमा तथा जन आरोग्य आयुष्मान सेवा योजना के साथ, स्वच्छ एवं भरपूर पेयजल, नीम कोटेड यूरिया, ई- चोपाल गाॅंवों में पहॅुचाने, गरीब किसान तथा महिलाओं के जनधन खाता खुलवाकर आधार कार्ड की मदद से पैसा डालने का कार्य किया गया है। मनरेगा में भी खर्च काफी बढ़ाया गया है जिससे किसान मजदूरों को फायदा पहुॅंचाया गया है। आज हमारी खेती को आधुनिक करने की जरुरत है इसके लिए के बी अग्रवाल ने सरकार को पत्र भी लिखा है।

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