Thursday, 6 May 2021

दीदी की सरकार तो बन गई लेकिन भाजपा के प्रदर्शन ने परेशान तो कर दिया: प्रहलाद

भोपाल। बंगाल में सत्ता में भले ही दीदी (ममता बनर्जी) की वापसी हो गई लेकिन उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रदर्शन ने उन्हें परेशान किया ही है। भाजपा के उत्तर बंगाल के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल की जमीनी स्तर पर की गई मेहनत रंग लाई। उनके पास 42 विधानसभा सीटों का प्रभार था जिनमें से 25 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने भारी मतों से जीत हासिल की।

दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार जिलों में तो तृणमूल कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला। भाजपा ने न केवल दार्जिलिंग की सभी पांच सीटों पर बड़ी जीत हासिल की बल्कि अलीपुरद्वार की भी पांचों सीटों पर कब्जा किया। कई सीटों पर कांटे की टक्कर रही और कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। दरअसल, इसके पीछे पार्टी की अच्छी चुनावी रणनीति रही। प्रहलाद पटेल ने हर बूथ पर जीत के लिए भाजपा के स्थानीय नेताओं व कार्यकताओं के साथ रणनीति तैयार की। चुनावी दौरे, रोड शो के अलावा जगह-जगह चाय पर चर्चा कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस दौरान स्थानीय मुद्दों पर आम लोगों से बातचीत की गई। घर-घर जाकर भाजपा के उम्मीदवारों को जीत दिलाने की अपील की गई। अपर बागडोरा में सामाजिक कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। घोषपुकुर में ग्राम प्रधान समेत अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली। सिलीगुड़ी में गोरखा समुदाय के लोगों के साथ ही प्रहलाद पटेल ने बैठक की और विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार गोरखा समुदाय की हर समस्या के समाधान के लिए तत्पर है। यही कारण रहा है कि ममता बनर्जी (दीदी) का दामन थामना बिमल गुरुंग को भारी पड़ा। सत्तारूढ़ पार्टी टीमएमसी के आशीर्वाद के बावजूद बिमल गुरुग के नेतृत्व वाला गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोमुमो-प्रथम) एक भी सीट नहीं जीत पाया। प्रहलाद पटेल ने चाय बागान के कर्मचारियों की समस्या को सुना। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम मजदूरी लागू की जाएगी। चुनाव से पहले कूचबिहार और दार्जिलिंग में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन भी किया गया था। इससे पहले मणिपुर में भी पटेल को चुनाव प्रभारी बनाया था जहां भाजपा को भारी सफलता मिली थी। 

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