Thursday, 6 May 2021

बंदियों को पैरोल पर रिहा करने की कवायद, शासन के आदेश का इंतजार, मुख्तार सहित 82 बंदी संक्रमित

विनोद मिश्रा
बांदा।
कोरोना की लहर में एक बार फिर बांदा जेल में निरुद्ध सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को पैरोल पर रिहा करने की कवायद शुरू हो गई। जल्द एक सैकड़ा से अधिक बंदी पैरोल पर रिहा हो सकते हैं। फिलहाल जेल प्रशासन को शासन के आदेश का इंतजार है।

पिछले वर्ष कोरोना काल में 42 बंदियों को आठ सप्ताह की पैरोल पर रिहा किया गया था। कोरोना संक्रमण की पहली लहर में बड़ी संख्या में जेल में निरुद्ध बंदियों के संक्रमित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले वर्ष मार्च माह में 41 बंदियों को आठ सप्ताह के पैरोल पर रिहा किया गया था।
हालांकि बाद में दो सप्ताह की अवधि और बढ़ा दी गई थी लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने महामारी का रूप ले लिया है। जेल में बंदियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद एक बार फिर जेल में निरुद्ध छोटे अपराधों के सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों को पैरोल पर रिहा करने का निर्णय लिया जा सकता है।
कारागार अधीक्षकों से ऐसे बंदियों की सूची तलब की है। जेल प्रशासन ने सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदियों की सूची तैयार करना शुरू कर दी है। कारागार अधीक्षक प्रमोद तिवारी ने बताया कि सजायाफ्ता बंदियों की सूची तैयार हो गई है।
ऐसे आधा सैकड़ा से अधिक बंदी चिह्नित किए गए हैं। विचाराधीन बंदियों के लिए संबंधित न्यायालयों से आदेश प्राप्त करना होगा। तभी उनकी रिहाई संभव है। हालांकि अभी शासन की ओर से बंदियों को पैरोल पर रिहा करने संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। 
जेल में अब तक 82 बंदी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें एक बंदी की मौत भी हो चुकी है। मौजूदा समय में जेल में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सहित दो बंदी कोरोना संक्रमित हैं। जिन्हें जेल में बने आइसोलेशन बैरक में रखा गया है। जेल में नए बंदियों के जेल आने पर रोक लगा दी गई है। उनके लिए अलग से शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डॉयट) में अस्थायी जेल खोली गई है। जहां पर वे 14 दिन तक क्वारंटीन रखे जा रहे हैं। रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें मुख्य जेल में भेजा जा रहा है।
कोरोना संक्रमण की पहली लहर में पिछले वर्ष मार्च माह में यहां के 41 सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदी पैरोल पर रिहा किए गए थे। इनमें चार बंदी अभी तक वापस नहीं आए। इनकी गिरफ्तारी के लिए जेल प्रशासन ने नवंबर माह में पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा था लेकिन पुलिस अब तक बंदियों को गिरफ्तार कर जेल लाने में नाकाम रही। 20 बंदी पैरोल खत्म होने पर समय से जेल वापस आ गए आए थे। 17 बंदी एक माह की देरी से लौटे थे।

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