कोरोना के चलते फिर प्रवासी मजदूर पलायन को मजबूर

अजय कुमार लखनऊ। कोरोना की दूसरी लहर के खतरों ने मुम्बई, पुणे दिल्ली आदि बड़े शहरों में रह कर रोजी-रोटी कमा रहे उत्तर प्रदेश-बिहार के मजदूर...

अजय कुमार
लखनऊ।
कोरोना की दूसरी लहर के खतरों ने मुम्बई, पुणे दिल्ली आदि बड़े शहरों में रह कर रोजी-रोटी कमा रहे उत्तर प्रदेश-बिहार के मजदूरों के ऊपर एक बार फिर जीवनयापन का खतरा मंडराने लगा है। 

महाराष्ट्र में कोरोना के चलते काम-धंधे बंद हो रहे हैं तो उद्धव सरकार अपने यहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को विश्वास नहीं दिला पा रही है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, जिसके चलते प्रवासी मजबूर अपने गांव-घर को पलायन को मजबूर हो गए हैं। 

मुम्बई से यूपी-बिहार की ओर आनी वाली टेªनों में जर्बदस्त भीड़ दिखाई पड़ रही है,तो मुम्बई जाने वाली गांड़ियों में आसानी से टिकट मिल रहा है। दरअसल, कोरोना महामारी के चलते मुम्बई में काफी उद्योग-धंधों पर ‘ताला’ लग गया है। लाॅकडाउन जैसे कदमों की आशंका ने एक बार फिर मजदूरों के पलायन का खतरा पैदा कर दिया है।

विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर के मद्देनजर लाॅकडाउन जैसे कदमों की आशंका ने एक बार फिर मजदूरों के पलायन का खतरा पैदा कर दिया है। 

बड़े शहरों में काम कर रहे प्रवासी मजदूर गांवों का रूख करने लगे हैं,लेकिन अभी हालात उतने खराब होते नहीं दिख रहे हैं जितने पिछले वर्ष देखने को मिले थे। पिछले साल लाॅकडाउन के दौरान जैसी स्थिति अभी नहीं दिख रही है, न ही ऐसे हालात बन ही पाएंगे, यूपी-बिहार जैसे राज्यों में ट्रेनों, बसों और हवाई जहाजों से दिल्ली, मुबंई, पुणे और बेंगुलरू जैसे शहरों से प्रवासी मजदूरों का सपरिवार लौटना बताता है कि उनमें भविष्य को लेकर आशंका गहरा रही है।

 अगर यह ट्रेंड  बढ़ता है तो पिछले कुछ माह के कामकाज के आधार के बाद से अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ने से जो रौनक लौटने लगी थी, वह फीकी पड़ सकती है। वैसे प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोरोना की पहली लहर के मुकाबले आज महामारी से निपटने के कहीं अधिक संसाधन हैं।

 उन्होंने यह भी कहा कि लाॅकडाउन इसे रोकने का पसंदीदा उपाय नहीं है। लेकिन नाइट कफ्र्यू और अन्य आंशिक पाबंदियों की प्रभावित इकाइयों ने मजदूरों, कर्मचारियों को औपचारिक या अनौपाचिरक रूप से घर भेजना शुरू किया है ताकि उन्हें बैठाकर खिलाने की मजबूरी न आन पड़े।

 बरहाल, इससे फर्क नहीं पड़ता कि मजदूर कोरोना हो जाने के डर से गांव जा रहे हैैं या काम बंद होने की आशंका से या मालिक के आदेश पर। वजह चाहे जो भी हो, नतीजा अगर इस रूप में सामने आता है कि कारखाने और कारोबार लेबर की कमी से बैठने लग जाएं तो यह सबके लिए चिंता की बात है। 

इस बीच कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी बताते हुए केंद्र पर भेदभाव का आरोप लगाना शुरू किया है, जिसका जवाब केंद्र की ओर से इस आरोप की शक्ल में दिया गया कि राज्यों को ऐसे मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए। इस विवाद का इससे बुरा समय नही हो सकता ।

अगर किसी क्षेत्र में किसी वजह से वैक्सीन की सप्लाई में तात्कालिक कमी आई है तो उसका निदान जरूर किया जाना चािहए, लेकिन उस पर हाय-तौबा मचाने या एक दूसरे पर दोषारोपण शुरू करने से आम लोगों में और घबराहट फेलेगी, जिससे नई समस्याएं पैदा होंगी। 

इस लिहाज से देखा जाए तो प्रधानमंत्री की यह सलाह उपयुक्त है कि वैक्सिनेशन के साथ टेस्ट, ट्रेस एंड ट्रीट का आजमाया हुआ तरीका अपनाया जाए। इसके साथ ही यह जरूर ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोरोना से लड़ाई के क्रम में आर्थिक गतिविधियां बाधित या बंद न की जाएं, उन्हें जारी रखने का सुरक्षित तरीका बताया जाए।

 कोरोना के कारण जब पिछले साल लॉकडाऊन की घोषणा हुई तो यातायात अचानक बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को झेलनी पड़ी थी। मजदूरों के लिए जब खाने की परेशानी हुई तो वह पैदल ही घर को निकल पड़े और सैंकड़ों किमी पैदल चलकर किसी तरह अपने घर पहुंचे थे।

जिसके बाद फैक्टरी शुरू हुई तो मजदूर काफी मशक्कत के बाद वापस लौटे थे। लेकिन अब दोबारा से कोरोना के मामले बढ़ने पर सख्ती शुरू हुई तो प्रवासी मजदूरों ने लॉकडाउन के भय से पलायन शुरू कर दिया है।

 यहां कुंडली, राई, नाथूपुर औद्योगिक क्षेत्र से करीब तीन हजार मजदूर पलायन कर चुके है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर केजीपी-केएमपी गोल चक्कर के पास मजदूरों की लाइन लगी रहती है। बहरहाल, प्रवासी मजदूरों के पलायन से उद्यमियों की परेशानी भी बढ़नी शुरू हो गई है। 

अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

क्योंकि पहले कोरोना के कारण फैक्टरी बंद रही तो उसके बाद किसान आंदोलन ने परेशानी बढ़ा दी। अब दोबारा से स्थिति सामान्य होती जा रही थी तो अब फिर से मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया। ऐसे में उद्यमियों के लिए मजदूरों का संकट खड़ा हो सकता है और उससे उद्योग प्रभावित होने का डर सताने लगा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति UPUKLive  उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार UPUKLive के नहीं हैं, तथा UPUKLive उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

Name

18plus Ajab Gajab Anokhi Dunia Desh Editorial Home Joke Lifestyle Manoranjan Popat Baba Tech upuklive website Videsh
false
ltr
item
Anokhi Dunia: कोरोना के चलते फिर प्रवासी मजदूर पलायन को मजबूर
कोरोना के चलते फिर प्रवासी मजदूर पलायन को मजबूर
https://upuklive.com/static/c1e/client/75722/uploaded/a07222326562c984c2b750293f05ff46.jpg
Anokhi Dunia
http://www.anokhidunia.com/2021/04/blog-post_503.html
http://www.anokhidunia.com/
http://www.anokhidunia.com/
http://www.anokhidunia.com/2021/04/blog-post_503.html
true
6020648095537431413
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy