भारत में 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष रहा 2020

नई दिल्ली डीवीएनए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के जलवायु अनुसंधान और सेवाओं (सीआरएस) ने 2020 के दौरान भारत की जलवायु को लेकर एक वक्तव...

भारत में 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष रहा 2020

नई दिल्ली डीवीएनए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के जलवायु अनुसंधान और सेवाओं (सीआरएस) ने 2020 के दौरान भारत की जलवायु को लेकर एक वक्तव्य जारी किया है।

विशेषताएं

भारत में 2020 के दौरान मुख्य सतह का औसत वार्षिक तापमान सामान्य से अधिक रहा। मुख्य सतह का औसत वार्षिक तापमान औसत अधिक +0.29 नैनो सेल्सियस रहा (1981-2010 के आंकड़ों के आधार पर)।

राष्ट्रव्यापी रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2020, 1991 के बाद से आठवां सबसे ज्यादा गर्म साल रहा। हालांकि, यह 2016 में भारत के सबसे गर्म वर्ष (+ 0.710 सेल्सियस) से काफी कम रहा। मॉनसून और मानसून के बाद के मौसम में क्रमशः तापमान (वास्तविक तापमान- सामान्य तापमान) का योगदान + 0.430 सेल्सियसऔर + 0.530 सेल्सियसका रहा। सर्दियों के दौरान औसत तापमान + 0.140 सेल्सियससामान्य से अधिक रहा। हालांकि, मानसून पूर्व सीज़न के दौरान तापमान सामान्य (-0.030 सेल्सियस) से नीचे रहा।

2020 के दौरान वैश्विक औसत सतही तापमान (वैश्विक जलवायु के डब्ल्यूएमओ स्टेट के अनुसार जनवरी से अक्टूबर) + 1.20सेल्सियसरहा। (स्रोत: https://ift.tt/35ejsBp)

1961-2010 के आंकड़ों के आधार पर, देश भर में 2020 की वार्षिक बारिश का औसत इसकी दीर्घकालीक औसत (एलपीए) का 109 फीसदी रही। पूरे देश में मानसून सीजन की बारिश सामान्य से अधिक रही और यह एलपीए का 109 फीसदी रही।

तापमान

2020 के दौरान देश की मुख्य सतह का औसत वार्षिक तापमान + 0.290 सेल्सियस था जो 1981-2010 की औसत अवधि से अधिक रहा। सामान्य से अधिक रहा। इस प्रकार साल 2020, 1901 के बाद आठवां सबसे गर्म साल रहा। देश के पांच सबसे गर्म साल इस प्रकार हैं: 2016 (+0.710 सेल्सियस), 2009 (+0.550 सेल्सियस), 2017 (+0.5410 सेल्सियस), 2010 (+5390 सेल्सियस), और 2015 (+0.420 सेल्सियस) रहे। उल्लेखनीय है कि हाल के 15 सालों (2006-2020) में से 12 साल सबसे अधिक गर्म साल रहे हैं।

पिछला दशक (2001-2010 / 2011-2020) 0.230 सेल्सियस/0.340 सेल्सियस के उतार चढ़ाव के साथ रिकॉर्ड सबसे गर्म दशक रहा। 1901-2020 के दौरान देश के औसत औसत तापमान में 0.620 सेल्सियस / 100 वर्ष की बढ़ती प्रवृत्ति दिखने को मिली जिसमें अधिकतम तापमान में महत्वपूर्ण वृद्धि की प्रवृत्ति (0.990 सेल्सियस / 100 वर्ष) और न्यूनतम तापमान में अपेक्षाकृत कम वृद्धि की प्रवृत्ति (0.240सेल्सियस / 100 वर्ष) देखने को मिली।

मॉनसून पूर्व सीज़न को छोड़कर सभी सीजन के दौरान देश का औसत सीजनल तापमान भी औसत से ऊपर रहा। मार्च और जून को छोड़कर साल के सभी महीनों के दौरान देश का मुख्य औसत मासिक तापमान सामान्य से अधिक गर्म रहा।

सितंबर के दौरान औसत तापमान सामान्य से अधिक (0.720 सेल्सियस, 1901 के बाद सबसे अधिक गर्म), अगस्त (0.580 सेल्सियस, दूसरा सबसे गर्म), अक्टूबर (0.940 सेल्सियस, तीसरा सबसे गर्म), जुलाई (0.560 सेल्सियस, पांचवां सबसे गर्म) और दिसंबर (0.390 सेल्सियस, सातवां सबसे गर्म) रहा।

बारिश

देश में वार्षिक बारिश 117.7 सेमी के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 109 फीसदी हुई। 1901 से देश में वार्षिक बारिश के कालक्रम को चित्र 2 में पूरी तरह से वर्णित किया गया है। पूरे देश में दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम (जून-सितंबर) के दौरान बारिश हुई, जो देश की प्रमुख वर्षा ऋतु है और इस दौरान सामान्य से अधिक (88 सेमी का एलपीए का 109 फीसदी) रही। इस मौसम के दौरान, देश के चार व्यापक भौगोलिक क्षेत्रों- मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय और पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में क्रमश: 115 फीसदी, 129 फीसदी और 106 फीसदी मौसमी बारिश हुई, जबकि उत्तर पश्चिम भारत में इसके एलपीए की 84 फीसदी मौसमी बारिश हुई।

पूरे देश में 2020 के पूर्वोत्तर मानसून के सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान सामान्य बारिश (एलपीए का 101%) हुई। दक्षिण प्रायद्वीप के मुख्य क्षेत्रों (5 उपखंड- तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और पुदुचेरी, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल) में भी बारिश सामान्य (एलपीए का 110 फीसदी) हुई। केरल को छोड़कर मुख्य क्षेत्र के सभी पांच उपखंडों में अत्यधिक / सामान्य बारिश हुई।

हिंद महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवात

साल 2020 के दौरान, उत्तर हिंद महासागर में 5 चक्रवाती तूफान आए। जो इस प्रकार है – भीषण चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’, बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘निवार’ और ‘गति’, गंभीर चक्रवाती तूफान ‘निसर्ग’ और चक्रवती तूफान ‘बुरेवी’। इन पांच में से निसर्ग और गति नाम के चक्रवाती तूफान अरब सागर में उठे जबकि बांकि के तीन तूफान- अम्फान, निवार और बुरेवी बंगाल की खाड़ी में आए थे। इन पांच सबसे विनाशकारी चक्रवातों में से भीषण चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ मानसून से पहले ही आ गया और इसने 20 मई को सुंदरवन के ऊपर पश्चिम बंगाल तट को पार किया। इसकी वजह से मुख्य रूप से बंगाल में 90 लोगों की मौत हुई।

मॉनसून सीजन के दौरान गंभीर चक्रवाती तूफान निसर्ग ने 3 जून को महाराष्ट्र तट को पार किया और महाराष्ट्र में 4 लोगों की मौत हुई तथा लगभग 2000 जानवर प्रभावित हुए। शेष तीन चक्रवात निवार, बुरेवी और गति मानसून सीजन के दौरान आए थे। गंभीर चक्रवाती तूफान निवार ने तमिलनाडु और पुदुचेरी तटों को पुदुचेरी के उत्तर में पार किया और तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में 12 लोगों की जिंदगी लील ली। चक्रवाती तूफान बुरेवी की वजह से तमिलनाडु में 9 लोगों था 200 जानवरों की मौत हुई। वीएससीएस ‘गति’ सोमालिया तट से टकराया था। इन सभी मौसम गतिविधियों और अन्य कम दबाव वाली प्रणालियों की वजह से मध्य तथा प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से अधिक बारिश हुई।

मौसमी घटनाओं का उच्च प्रभाव

देश को भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन जैसी मौसमी घटनाओं का भी खूब सामना करना पड़ा। इनमें से कुछ का वर्णन नीचे दिया जा रहा है। यहां बताई गई मौतों का आंकड़ा मीडिया और सरकारी रिपोर्टों पर आधारित हैं।

साल के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे बुरी तरह से प्रभावित राज्य रहे, जहां प्रत्येक राज्य में बिजली गिरने और ठंड की वजह से 350 से अधिक लोगों की मौत हुई।

मानसून के मौसम से पहले और बाद में देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इनमें से असम में 129, केरल में 72 (विशेष रूप से 65 लोग एक ही दिन भूस्खलन में मारे गए, जो केरल के मुन्नार, इंदूकी जिले के पेटीमुड्डी में 7 अगस्त को आया था), तेलंगाना में 61 मौतें ( 1 अक्टूबर से 20 अक्टूबर के बीच 59 लोगों की मौत हुई)। बिहार में 54, महाराष्ट्र में 50, उत्तर प्रदेश में 48 और हिमाचल प्रदेश में 38 मौतें हुईं।

देश के विभिन्न हिस्सों में तूफान और बिजली गिरने से 800 लोगों की मौत हुई। इनमें से बिहार में 280, उत्तर प्रदेश में 220, झारखंड में 122, मध्य प्रदेश में 72, महाराष्ट्र में 23 और आंध्र प्रदेश में 20 लोगों की मौत हुई। देश के मध्य भागों में सर्द हवाओं ने मुख्य रूप से जनवरी में 150 लोगों की जान ले ली। इनमें से अकेले उत्तर प्रदेश में 88 मौतें हुईं, जबकि बिहार में एक ही दिन में 45 मौतें हुईं और 16 मौत झारखंड में हुईं।

2020 के दौरान जो प्रमुख मौसमी की घटनाएं और उससे जुड़ी मौतों हुईं उन्हें चित्र 4 में दिखाया गया है।

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