सत्ता की वास्तविकता से जनता को दूर रखते हैं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अधिकांश चैनल : सुरेन्द्र नाथ

राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी ने लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ मीडिया के सन्दर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि इसी स्तम्भ की ओर देश की एक सौ तीस करोड़ जनता आँखों से टकटकी लगाए तथा मन मस्तिष्क से सजग होकर देखती रहती है। यह देश का दुर्भाग्य है कि अब भी लगभग 50 प्रतिशत लोग साक्षरता की कमी अथवा गरीबी के कारण प्रिन्ट मीडिया का लाभ प्राप्त करने में अस्मर्थ हैं और देश की वास्तविकता से अपरिचित रहते हैं। यहाँ पर यह अधिक प्रासंगिक है कि विगत कई वर्षों से अधिकांश प्रिन्ट मीडिया ही अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहा है जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अधिकांश चैनल सत्ता की वास्तविकता से जनता को दूर रखते हैं।
प्रवक्त श्री त्रिवेदी ने आईपीएन को दिए अपने बयान में कहा कि 26 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने 1999 की केन्द्रीय भाजपा सरकार के कोयला मंत्री रहे दिलीप रे सहित तीन लोगों को तीन तीन साल की सजा और 10-10 लाख रुपए जुर्माना लगाया था। इस अदालती कार्यवाही को अधिकांश प्रिन्ट मीडिया ने अखबारों में छापा। उन्होंने कहा कि चार दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि देश में स्वयं को नम्बर एक कहने वाले चैनलों ने नाम तक लेना जरूरी नहीं समझा। यदि यही खबर विपक्ष से सम्बन्धित होती तो शायद ऐसे चैनल चौबीसों घंटे यही खबर दिखाते और अनेक लोगों के साथ बैठकर बहस का आयोजन किया जाता। अदालत की यह सजा 1999 में झारखंड में ब्रम्हाडीह कोयला ब्लॉक आबंटन में अनियमिताओं से सम्बन्धित कोयला घोटाले के मामले में सुनाई थी। भाजपा की केन्द्र सरकार होने के कारण चहेते और चाटुकार चैनलों की चुप्पी भी लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
रालोद प्रवक्ता ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सार्थकता चतुर्थ स्तम्भ के रुप में इसलिए और अधिक बढ़ जाती है कि इस माध्यम से अमीर, गरीब और पढे़ लिखे तथा अनपढ़ आदि सभी को देश के हालात की जानकारी होती है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह चतुर्थ स्तम्भ अपनी कमजोरी को दूर करेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों मूल्यों की रक्षा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। अकेले प्रिन्ट मीडिया जन जन तक देश की स्थिति से अवगत कराने में अस्मर्थ रहेगा क्योंकि साक्षरता और गरीबी इस देश का दुर्भाग्य है।

source https://upuklive.com/deshvidesh/most-channels-of-electronic-media-keep-the-public-away-from/cid1589256.htm

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